शीतला अष्टमी 2026

शीतला अष्टमी: रोग-दुख से मुक्ति के लिए करें शीतला चालीसा का पाठ, जानें पूरी चालीसा

शीतला अष्टमी, जिसे बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा से रोग, कष्ट और संकट दूर होता है।

By : Admin
शीतला अष्टमी: रोग-दुख से मुक्ति के लिए करें शीतला चालीसा का पाठ, जानें पूरी चालीसा

माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप पूजा जाता है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन माता की पूजा-अर्चना और शीतला चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी कष्ट, रोग और संकट दूर होते हैं तथा घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। 

इस साल यह पर्व 10 मार्च को मनाया जाएगा। इसे कई जगह पर बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पूरे विधि विधान से माता शीतला की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति से शीतला चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और परिवार में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

नीचे पढ़ें शीतला चालीसा—

॥ दोहा ॥
जय-जय माता शीतला, तुम्हहिं धरै जो ध्यान।
होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बलज्ञान॥

॥ चौपाई ॥
जय-जय-जय शीतला भवानी, जय जग जननि सकल गुणखानी।
गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित, पूरण शरदचन्द्र समसाजित॥

विस्फोटक से जलत शरीरा, शीतल करत हरत सब पीरा।
मातु शीतला तव शुभनामा, सबके गाढ़े आवहिं कामा॥

शोकहरी शंकरी भवानी, बाल-प्राणरक्षी सुख दानी।
शुचि मार्जनी कलश करराजै, मस्तक तेज सूर्य समराजै॥

चौसठ योगिन संग में गावैं, वीणा ताल मृदंग बजावैं।
नृत्य नाथ भैरो दिखरावैं, सहज शेष शिव पार न पावैं॥

धन्य-धन्य धात्री महारानी, सुरनर मुनि तब सुयश बखानी।
ज्वाला रूप महाबलकारी, दैत्य एक विस्फोटक भारी॥

घर-घर प्रविशत कोई न रक्षत, रोग रूप धरि बालक भक्षत।
हाहाकार मच्यो जगभारी, सक्यो न जब संकट टारी॥

तब मैया धरि अद्भुत रूपा, कर में लिये मार्जनी सूपा।
विस्फोटकहिं पकड़ि कर लीन्ह्यो, मुसल प्रहार बहुविधि कीन्ह्यो॥

(आदि शीतला चालीसा…)

॥ दोहा ॥
घट-घट वासी शीतला, शीतल प्रभा तुम्हार।
शीतल छइयां में झुलई, मइया पलना डार॥

नोट: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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