AI Era and India’s New Dawn: From Adoption to Glob

एआई का युग और भारत का नया सवेरा

AI के दौर में भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, अर्थव्यवस्था, शासन और युवाओं के लिए खुल रहे नए अवसर।

By : स्वदेश डेस्क
एआई का युग और भारत का नया सवेरा

21 वी सदी की तकनीकी क्रांति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में उभरा है। भारत, जो कभी तकनीक को अपनाने में पिछड़ जाता था. आज एआई के युग में एक वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है। 2026 तक, भारत ने इंडिया एआई मिशन के तहत 38 हजार से अधिक जीपीयू तैनात करके अपनी क्षमता का प्रमाण दिया है। सवाल यह नहीं है कि एआई से भारत बदलेगा या नहीं, बल्कि यह है कि यह बदलाव कितना गहरा और समावेशी होगा।

एआई न केवल अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि सामाजिक और शासन संरचना को भी नई दिशा देगा। एआई वर्ष 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 1.7 ट्रिलियन से अधिक जोड़ने की क्षमता रखता है। यह केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि में फसलों की भविष्यवाणी, स्वास्थ्य सेवाओं में रिमोट डायग्नोस्टिक्स और छोटे व्यवसायों को 'स्मार्ट' बनाकर समावेशी विकास को बढ़ावा देगा। एआई आधारित शासन के माध्यम से, सरकार 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के विजन को साकार कर रही है। आधार मित्र जैसेचैटबॉट, एआई-आधारित जन शिकायतों का निवारण और डेटा संचालित नीतियां सरकारी सेवाओं को अधिक कुशल, पारदर्शी बना रही है।

एआई युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है। 'डिजिटल श्रमसेतु' जैसी पहलों से 60 लाख से अधिक लोग एआई ईकोसिस्टम में काम कर रहे हैं। यह युवा शक्ति को कुशल बनाकर भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार कर रहा है। भाषिनी और भारतजेन जैसी पहलें, एआई के माध्यम से भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं को डिजिटल बना रही है, जिससे तकनीकी अंतराल को पाटने में मदद मिल रही है। एआई के साथ जोखिम भी हैं जैसे नौकरियों का विस्थापन, डीपफेक और एआई-जनित कटेट। भारत सरकार इन जोखिमों को समझते हुए, 20 फरवरी 2026 से एआई-जनित सामग्री को लेबल करने जैसे सख्त नियम ला रही है। 'एआई को भारत में बनाना और भारत के लिए काम कराना' का लक्ष्य जिम्मेदार एआई विकास को प्राथमिकता देता है।

तकनीक के रूप में अपनाना होगा। भारत के पास अपनी विशाल प्रतिभा और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के साथ, यह साबित करने का मौका है कि एआई का उपयोग न केवल नवाचार के लिए, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए भी किया जा सकता है। एआई का सही उपयोग 'विकसित भारत 2047' के विजन को समय से पहले साकार कर सकता है। भारत एआई में भय नहीं, भाग्य देखता है, हमारे युवा नए नए टूल्स विकसित कर रहे हैं, लेकिन दुनिया के दूसरे देशों को एआई के मामले में सोच बदलनी होगी, गोपनीयता छोड़नी होगी। एआई को लोकतांत्रिक नजरिए से देखना होगा, कोडिंग जाहिर करनी होगी, तभी इसे मानवता के भले के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

मोदी की बातों का एआई की दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं ने समर्थन किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों का मानना है कि भारत ने दुनिया में वो कर दिखाया, जो कोई अन्य देश नहीं कर सका, भारत ने एक अरब 40 करोड़ लोगों की डिजिटल पहचान बनाई, भारत ने ऐसी भुगतान प्रणाली बनाई, जिसमें हर महीने 20 अरब लेनदेन की प्रॉसेसिंग होती है। भारत एआई में विश्व का अग्रणी बनना चाहता है, हमारे देश के पास दिमाग भी है, युवा शक्ति भी है और सरकार का समर्थन भी है। मोदी एआई के खतरों के बारे में भी सावधान है, एआई बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है, एआई के कारण युवाओं की नौकरियां जा सकती हैं, एआई लोगों को डीपफेक के जरिए गुमराह कर सकता है।

इस तरह के सारे खतरों का जिक्र आज हुआ। एआई हमारे सामने है। इसे रोका नहीं जा सकता। अब ये हम पर है कि इसका इस्तेमाल कैसे करें, इंसानों की भलाई के लिए या समाज को नष्ट करने के लिए। एआई जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उस पर नियंत्रण भी उतनी ही रफ्तार से करना होगा। यहां ठहराव, रुकने और सोचने का न समय है, न अवसर।

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