Ganesh Shankar Vidyarthi Balidan Diwas

बलिदान दिवस आज: हिंदी पत्रकारिता के निर्भीक स्तंभ गणेश शंकर विद्यार्थी

हिंदी पत्रकारिता के निर्भीक स्तंभ गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस। जानिए उनके जीवन, संघर्ष और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान।

By : स्वदेश डेस्क
बलिदान दिवस आज: हिंदी पत्रकारिता के निर्भीक स्तंभ गणेश शंकर विद्यार्थी

डॉ. अशोक कुमार भार्गव

26 इलाहाबाद में जन्में विद्यार्थी का बचपन मध्यप्रदेश के वर्तमान अशोकनगर जिले के मुंगावली में बीता। प्रारंभिक शिक्षा प्रयागराज में हुई। पढ़ाई के दौरान ही उनका विवाह हो गया। कानपुर कर्म स्थली रही। कानपुर के सूती मिल के मजदूरों की दुर्दशा देख उनके हितों के संघर्ष हेतु उन्हें संगठित किया। 1908 में कानपुर करंसी में नौकरी की बाद में हाईस्कूल में शिक्षक बने किंतु दोनों ही स्थान पर देश प्रेम को समर्पित 'अभ्युदय' पत्रिका पढ़ने से मना करने पर स्वाभिमानी विद्यार्थी ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। 1913 में महाराणा प्रताप के पराक्रम से प्रेरित होकर 'प्रताप' नामक साप्ताहिक पत्र प्रारंभ किया। 

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने आशीष स्वरूप 'प्रताप' के लिए यह पंक्तियां प्रेषित की 'जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है, वह नर नहीं नर पशु निरा है और मृतक समान है' विद्यार्थी ने इसे आरंभ से अंत तक 'प्रताप' का मूल मंत्र बना पत्रकारिता को सामाजिक कर्म का प्रतीक निरूपित किया। प्रताप का समग्र सृजन नैतिक मूल्यों, आदशों, जनआंदोलनों और आजादी की लड़ाई के प्रति प्रतिबद्ध था। स्वाधीनता संग्राम के उच्चतम प्रतिमानों से प्रेरित होकर विद्यार्थी ने प्रताप के पहले अंक में प्रताप की नीति' लेख लिखा जो आज भी पत्रकारिता के आदर्श घोषणा पत्र के रूप में प्रतिष्ठित है। वे लिखते हैं 'आज अपने हृदय में नई-नई आशाओं को धारण करके और अपनी उद्देश्यों पर पूर्ण विश्वास रखकर प्रताप कर्म क्षेत्र में आता है। समस्त मानव जाति का कल्याण हमारा परमोद्देश्य है और इसकी प्राप्ति का एक बहुत गई। बड़ा जरूरी साधन हम भारतवर्ष की उन्नति को समझते हैं। 

अंग्रेज हुकूमत ने 23 मार्च 1925 को शहीद ए आजम भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुना दी। समग्र राष्ट्र शोक संतप्त हुआ। कानपुर में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए। सर्वधर्म समभाव को भारत की आत्मा मानने वाले विद्यार्थी स्वयंसेवकों के साथ हिंदू मुस्लिम दंगों की धधकती ज्वाला को शांत करने, पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए उनके बीच चले गए। इसी दौरान दंगाइयों ने उनकी नृशंस हत्या कर दी। दो दिन बाद लाशों के ढेर में उनके शव की पहचान की गई। हैवानियत के उस नरक में आजादी का स्वप्न देखने वाली आंखें सदा के लिए बंद हो।



 

संबंधित सामग्री

नारद जयंती विशेष: देवर्षि नारद की पत्रकारिता में वैश्विक समस्याओं का समाधान

नारद जयंती विशेष: देवर्षि नारद की पत्रकारिता में वैश्विक समस्याओं का समाधान

देवर्षि नारद को आद्य पत्रकार क्यों कहा जाता है? नारद जयंती पर जानिए भारतीय पत्रकारिता, संवाद और समाजहित के उनके सिद्धांत आज भी क्यों प्रासंगिक हैं।

May 02, 2026
पुण्यतिथि आज: वीरता-बलिदान के प्रतीक चन्द्रशेखर आजाद

पुण्यतिथि आज: वीरता-बलिदान के प्रतीक चन्द्रशेखर आजाद

27 फरवरी को अमर क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद की पुण्यतिथि है। बचपन से लेकर अल्फ्रेड पार्क के बलिदान तक, जानिए उनके संघर्ष और शहादत की कहानी

Feb 27, 2026
साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय और पत्रकार अतुल तारे को मिलेगा हिंदी गौरव अलंकरण 2026

साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय और पत्रकार अतुल तारे को मिलेगा हिंदी गौरव अलंकरण 2026

इंदौर में होगा हिंदी गौरव अलंकरण समारोह, दो हिंदी साधकों का होगा सम्मान

Feb 03, 2026
हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर एनयूजे (I) उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम में बोलीं उच्च शिक्षा राज्य मंत्री

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर एनयूजे (I) उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम में बोलीं उच्च शिक्षा राज्य मंत्री

अतिथियों ने लखनऊ इकाई से जुड़े पत्रकारों को 'एनयूजे (आई) सम्मान समारोह' से किया अलंकृत

May 30, 2025