होर्मुज संकट और नाटो की चुनौती

होर्मुज संकट और नाटो की चुनौती

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार प्रभावित। नाटो की संभावित भूमिका पर चर्चा तेज।

By : स्वदेश डेस्क
होर्मुज संकट और नाटो की चुनौती

AI

प्रो. अंशु जोशी

पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ किसी भी छोटी चिंगारी के बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह बढ़े सैन्य हमलों ने अप्रैल 2026 के युद्धविराम को लगभग निष्प्रभावी बना दिया है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ उभर आई हैं। सबसे गंभीर बात यह रही कि ईरान द्वारा दो भारतीय जहाजों पर किए गए हमलों में एक भारतीय नाविक की मृत्यु हुई, जिसके बाद भारत ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इन घटनाओं ने यह प्रश्न और प्रासंगिक बना दिया है कि क्या नाटो अब केवल दर्शक बना रहेगा या पश्चिम एशिया में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

अप्रैल 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर हुआ अंतरिम युद्धविराम कभी भी स्थायी शांति में नहीं बदल सका। अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई सीमित करने की घोषणा की, किंतु ईरान ने क्षेत्रीय तेल प्रतिष्ठानों, खाड़ी के अरब देशों तथा समुद्री मार्गों पर ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रखे। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे। इस सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से अवरुद्ध करने की ईरानी कोशिशों ने पूरे संकट को नए स्तर पर पहुँचा दिया।

ईरान लंबे समय से होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना प्रभाव बनाए रखने, वहाँ से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण स्थापित करने तथा क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को व्यापक राजनीतिक विवादों से जोड़ने का प्रयास करता रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका की प्राथमिकता ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसके क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों पर अंकुश लगाने की रही है। परिणामस्वरूप, कूटनीतिक वार्ताएँ जारी रहने के बावजूद सैन्य टकराव लगातार बढ़ता गया।

युद्धविराम टूटने के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और नियंत्रण केंद्रों पर जवाबी कार्रवाई की। अमेरिकी सेना ने कई मिसाइलों और ड्रोन को भी निष्क्रिय करने का दावा किया। इसके प्रत्युत्तर में ईरान ने बहरीन, कुवैत तथा ओमान के निकट अमेरिकी हितों और समुद्री जहाजों को निशाना बनाया। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व सार्वजनिक रूप से बातचीत की इच्छा भी व्यक्त करते रहे और समानांतर रूप से सैन्य कार्रवाई भी जारी रही। यह स्थिति बताती है कि वर्तमान संघर्ष पारंपरिक युद्ध और कूटनीति का एक जटिल मिश्रण बन चुका है।

इस तनाव का सबसे बड़ा प्रभाव खाड़ी के देशों की सुरक्षा पर पड़ा है। बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को प्रत्यक्ष मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा झेलना पड़ा है। इससे उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ी हैं और अमेरिका सहित बाहरी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उनकी निर्भरता और गहरी हुई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी चेतावनी दे चुके हैं कि यदि यह संघर्ष नियंत्रित नहीं हुआ, तो पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध की स्थिति बन सकती है, जिसके आर्थिक और मानवीय परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है। हाल के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें बार-बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। समुद्री परिवहन महँगा हुआ, बीमा लागत बढ़ी और अनेक जहाजों को अपना मार्ग बदलना पड़ा। इससे स्पष्ट है कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का प्रश्न बन चुका है।यही कारण है कि यूरोपीय और एशियाई देशों ने भी अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान से बचने के लिए वैकल्पिक साझेदारियों और सामूहिक समुद्री सुरक्षा तंत्र पर चर्चा तेज हुई है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह संकट विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उनकी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा भाग इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है।

इन परिस्थितियों में नाटो की भूमिका को लेकर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। अब तक नाटो पश्चिम एशिया में प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बचता रहा है। उसने 1994 के भूमध्यसागरीय संवाद और 2004 की इस्तांबुल सहयोग पहल (आईसीआई) के माध्यम से बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ प्रशिक्षण, राजनीतिक परामर्श और सीमित सुरक्षा सहयोग बनाए रखा है। किंतु ये व्यवस्थाएँ सामूहिक रक्षा की गारंटी नहीं देतीं और न ही इन देशों को नाटो सदस्य जैसी सुरक्षा प्रदान करती हैं।फिर भी हाल की घटनाओं ने नाटो सदस्य देशों के दृष्टिकोण में परिवर्तन के संकेत दिए हैं। ब्रिटेन द्वारा इस सप्ताह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को आतंकवादी संगठन घोषित करना इसी बदलते रुख का उदाहरण माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त फ्रांस और ब्रिटेन ने लगभग एक दर्जन देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की योजना पर काम शुरू किया है। कई नाटो सदस्य पहले से ही इस क्षेत्र में युद्धपोत और माइनहंटर तैनात कर चुके हैं।

इतिहास भी बताता है कि यदि सदस्य देशों के बीच राजनीतिक सहमति बन जाए, तो नाटो यूरो-अटलांटिक क्षेत्र से बाहर भी सैन्य अभियान चला सकता है। कोसोवो, अफगानिस्तान और लीबिया इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसलिए पश्चिम एशिया में नाटो की संभावित सक्रियता को पूरी तरह असंभव नहीं कहा जा सकता।

फिर भी इसके सामने अनेक बाधाएँ हैं। नाटो संधि का अनुच्छेद-5 केवल सदस्य देशों की सामूहिक रक्षा पर लागू होता है। खाड़ी के देश नाटो के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन पर हमले की स्थिति में नाटो कानूनी रूप से हस्तक्षेप के लिए बाध्य नहीं है। इसके अलावा गठबंधन के भीतर भी इस बात पर मतभेद हैं कि ईरान के विरुद्ध प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई कितनी उचित होगी, विशेषकर तब, जब यूरोप रूस-यूक्रेन संघर्ष और हिंद-प्रशांत की सुरक्षा चुनौतियों से भी जूझ रहा है। इसके बावजूद, यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को लंबे समय तक अवरुद्ध रखने या अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को बाधित करने का प्रयास जारी रखता है, तो नाटो पर सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव लगातार बढ़ सकता है। विश्व की ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के नाम पर गठबंधन सीमित सैन्य हस्तक्षेप या बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा अभियान का रास्ता अपना सकता है।

ईरान को भी यह समझना होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी वैश्विक समुद्री धमनियों को राजनीतिक या सैन्य हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अंततः उसके विरुद्ध व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन को जन्म देगा। यदि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बार-बार बाधित होती रही, तो पश्चिम एशिया का यह संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक शक्तियों की प्रत्यक्ष भागीदारी का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में नाटो की भूमिका केवल संभावना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का अगला निर्णायक अध्याय भी बन सकती है।

संबंधित सामग्री

US Iran Attack: अमेरिका ने वोटिंग से कुछ घंटे पहले ईरान के केश्म द्वीप पर किया हमला, 5 धमाकों से मची हलचल

US Iran Attack: अमेरिका ने वोटिंग से कुछ घंटे पहले ईरान के केश्म द्वीप पर किया हमला, 5 धमाकों से मची हलचल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच केश्म द्वीप पर हुए पांच धमाकों ने मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है।ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, द्वीप पर पांच धमाके सुनाई दिए

Nov 03, 2026
अमेरिका में भारतीय मूल के विद्वानों को मिला NJIT का प्रतिष्ठित अवॉर्ड

अमेरिका में भारतीय मूल के विद्वानों को मिला NJIT का प्रतिष्ठित अवॉर्ड

अमेरिका के NJIT ने 2026 Nexus of Excellence Awards में तीन भारत में जन्मे विद्वानों को सम्मानित किया। जानिए अशिष बोर्गोंकर, अरीत्र दासगुप्ता और शाहिद अकबर को किस उपलब्धि के लिए मिला पुरस्कार।

Oct 27, 2026
Israel Elections 2026: नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट! आज वोटिंग से तय होगी इजरायल की सियासत

Israel Elections 2026: नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट! आज वोटिंग से तय होगी इजरायल की सियासत

इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। नेतन्याहू को गादी आइज़ेनकोट समेत विपक्षी नेताओं से चुनौती है। सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।

Oct 27, 2026
Smriti Irani Marathon Meeting: छत्तीसगढ़ में स्मृति ईरानी की मैराथन बैठकें, मंत्रियों से होगी चर्चा

Smriti Irani Marathon Meeting: छत्तीसगढ़ में स्मृति ईरानी की मैराथन बैठकें, मंत्रियों से होगी चर्चा

छत्तीसगढ़ बीजेपी की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी और सह प्रभारी सिद्धार्थ शम्भू सोमवार रायपुर में दिनभर बैठकें करेंगे। विधायकों, सांसदों और मंत्रियों से संगठन की स्थिति पर चर्चा होगी।

Oct 26, 2026
Smriti Irani Raipur Visit: स्मृति ईरानी का छत्तीसगढ़ भाजपा कार्यकर्ताओं को संदेश, बिना बुलाए कार्यालय न आएं

Smriti Irani Raipur Visit: स्मृति ईरानी का छत्तीसगढ़ भाजपा कार्यकर्ताओं को संदेश, बिना बुलाए कार्यालय न आएं

छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी रायपुर पहुंचीं और कार्यकर्ताओं को अनुशासन का संदेश दिया। दो दिन में वह संगठन की स्थिति और रणनीति पर मंथन करेंगी।

Oct 25, 2026