Iran-Israel War: Ceasefire Confusion Deepens

युद्ध विराम पर संशय !

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच ट्रंप के सीजफायर दावे पर संशय। दोनों पक्षों ने नहीं दी पुष्टि, वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति पर असर जारी।

By : स्वदेश डेस्क
युद्ध विराम पर संशय !

अमेरिकी के बड़बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ अस्थायी युद्ध विराम की घोषणा क्या वास्तव में सच है। दरअसल विश्व के किन्हीं भी देशों में जब युद्ध होता है तो युद्ध विराम की घोषणा ट्रंप के मुंह से होती है जबकि सच्चाई कुछ और ही निकलती है। ईरान से युद्ध को लेकर भी लगभग यही स्थिति है क्योंकि उनके द्वारा की गई युद्ध विराम की घोषणा के कई घंटों बाद भी स्थिति जस की तस है। यानी कि ईरान और इजराइल दोनों ही हमले जारी रखे हुए है। जिससे संशय की स्थिति है कि आखिर ट्रंप ने ऐसा क्यों किया। 

माना तो यह जा रहा है कि वह अपनी ही चाल में फंसकर कुछ भी बोल जाते हैं। क्योंकि अभी तक की स्थिति में युद्ध विराम पर न तो ईरान की रजामंदी है और न ही अमेरिका के साथ युद्ध में शामिल इजराइल की ओर से हां कही गई है। हालांकि ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को टालना और बातचीत होने की बात कहकर अस्थायी युद्ध विराम की बात की है। जबकि ईरानी मीडिया ने इस समझौते के दावे को गलत बताया है, जिससे स्थिति उलझन में है। दरअसल इस युद्ध को 25 वां दिन है जिससे दुनिया के देशों में तेल और एलपीजी को लेकर हा-हाकार मचा हुआ है। शेयर बाजार के साथ ही सोना चांदी के दाम गिर रहे हैं। 

साथ ही ट्रांसपोर्टेशन की कमी से महंगाई भी बढ़ गई है। इसका असर कई सारे देशों पर पड़ा है। यही कारण है कि अपनी दादागिरी के लिए युद्ध में कूदे ट्रंप को सबसे ज्यादा मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि ईरान कहीं से भी झुकने को तैयार नहीं है। इसलिए ट्रंप ने पहले तो स्ट्रेट ऑफ होमुंज खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था लेकिन फिर भी ईरान पर कोई असर नहीं हुआ और उसने हमले जारी रखे। ट्रम्प का कहना है कि उन्होंने परमाणु हथियार छोड़ने की ईरान की प्रतिवद्धता के साथ सकारात्मक बातचीत की है। ईरानी मीडिया ने इन दावों को नकारा है और इसे 'फेक न्यूज' बताते हुए कहा कि कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। वहीं इजराइल भी अमेरिका के सीजफायर से हैरान है। 

ऐसे में वर्तमान स्थिति में अनिश्वितता का माहौल है कि 5 दिनों का ठहराव एक स्थायी शांति में बदलेगा या यह सिर्फएक अस्थायी रणनीतिक कदम है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले दो दिनों में, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में हमारी आपसी दुश्मनी को पूरी तरह से खत्म करने के संबंध में बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत हुई है। इन गहरी, विस्तृत और रचनात्मक बातचीत के मिजाज और लहजे को देखते हुए जो पूरे हफ्ते जारी रहेगी, मैंने युद्ध विराम का निर्देश दिया है। जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। ट्रंप ने कहा था अगर इस समय सीमा में होमुंज को नहीं खोला गया तो दे ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेंगे।

इसके जवाब में ईरान ने कहा था अगर अमेरिका ने ईरान के पावर नेटवर्क को निशाना बनाया, तो वह इजराइल के पावर प्लांट और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के ठिकानों को बिजली सप्लाई करने वाले प्लांट पर हमला करेगा। ट्रंप का 48 घंटे वाला यह अल्टीमेटम मंगलवार 24 मार्च की शुरुआत के साथ ही समाप्त हो गया, लेकिन इसके पहले ही ट्रंप ने युद्ध विराम की बात कहकर संशय की स्थिति ता दी। लेकिन ईरानी मीडिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को गलत बताया है। ईरानी मीडिया का कहना है कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई। यानि दोनों पक्षों के दावों में बड़ा फर्क सामने आया है, जिससे स्थिति और उलझती नजर आ रही है। अमेरिका के युद्ध विराम के दबाव के बावजूद इजराइल ने भी इसे खारिज कर दिया है। उसने रफह में सैन्य अभियान जारी रखा है। 

इजराइल का स्पष्ट रुख है कि हमास का खात्मा होने तक कोई स्थायी युद्ध विराम नहीं होगा। मौजूदा हालातों में भारत का रुख न्यूट्रल रहा है। उसने युद्धरत देशों से शांति की अपील के साथ संकटकालीन स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी है। क्योंकि युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है जिससे तेल, गैस सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात में बाधा खड़ी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इन सबसे निपटने को तैयार रहने को कहा है।

 

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