Papmochani Ekadashi 2026: Significance & Rituals

पापों को नष्ट करने वाली पापमोचनी एकादशी व्रत

पापमोचनी एकादशी व्रत 15 मार्च 2026 को। जानें इसका महत्व, पूजा विधि, दान, जागरण और पारण समय, जो पापों के नाश और सुख-समृद्धि लाने में सहायक है।

By : स्वदेश डेस्क
पापों को नष्ट करने वाली पापमोचनी एकादशी व्रत

मुकेश ऋषि

देवभूमि भारत देष में नित्य पर्व प्राचीन ऋषियों की शोधपरक देन है। पर्व-त्योहारों के पीछे काफी कल्याणमयी गहरा रहस्य छुपा हुआ है। कभी होली, कभी दिवाली, कभी छठ व्रत, कभी तीज तो कभी दशहरा वर्षभर यह सिलसिला चलता रहता है। इन्हीं पर्व-त्योहारों, व्रतों में पापमोचनी एकादशी का व्रत काफी शक्तिसंपन्न, उर्जा से अनुप्राणित है, जो तरह-तरह के दुःखों-कष्टों को हरने में पूर्णतः समर्थ है। पापमोचनी एकादशी का अर्थ है, पाप को नष्ट करने वाली एकादशी। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

पापमोचनी एकादशी के दिन किसी की निंदा और झूठ बोलने से बचना चाहिए। इस व्रत को करने से ब्रह्महत्या, स्वर्ण-चोरी, मदिरापान, अहिंसा और भ्रूणघात समेत अनेक घोर पापों के दोष से मुक्ति मिलती है। समस्त पापों को नष्ट करने वाली पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा विधि इस प्रकार हैं:-1. एकादशी के दिन सूर्योदय काल में स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प करें। 2. इसके बाद भगवान विष्णु की षोडषोपचार विधि से पूजा करें और पूजन के उपरांत भगवान को धूप, दीप, चंदन और फल आदि अर्पित करके आरती करनी चाहिए। 3. इस दिन भिक्षुक, जरूरतमंद व्यक्ति व ब्राह्मणों को दान और भोजन अवश्य कराना चाहिए।

पापमोचनी एकादशी पर रात्रि में निराहार रहकर जागरण करना चाहिए और अगले दिन द्वादशी पर पारण के बाद व्रत खोलना चाहिए। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। एकादशी तिथि को जागरण करने से कई गुना पुण्य भी मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पुरातन काल में चैत्ररथ नामक एक बहुत सुंदर वन था। इस जंगल में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या करते थे। इसी वन में देवराज इंद्र गंधर्व कन्याओं, अप्सराओं और देवताओं के साथ विचरण करते थे। मेधावी ऋषि शिव भक्त और अप्सराएं शिवद्रोही कामदेव की अनुचरी थी। एक समय कामदेव ने मेधावी ऋऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजूघोषा पर मोहित हो गए।

इसके बाद दोनों ने अनेक वर्ष साथ में व्यतीत किए। एक दिन जब मंजूघोषा ने जाने के लिए अनुमति मांगी तो मेधावी ऋषि को अपनी भूल और तपस्या भंग होने का आत्मज्ञान हुआ। इसके बाद क्रोधित होकर उन्होंने मंजूघोषा को पिशाचनी होने का श्राप दिया। इसके बाद अप्सरा ने ऋषि के पैरों में गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा। मंजूघोषा के अनेकों बार विनती करने पर मेधावी ऋषि ने उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत करने का उपाय बताया और कहा। इस व्रत को करने से तुम्होरे पापों का नाश हो जाएगा व तुम पुनः अपने पूर्व रूप को प्राप्त करोगी। अप्सरा को मुक्ति का मार्ग बताकर मेधावी ऋषि अपने पिता महर्षि च्यवन के पास पहुंचे। 

श्राप की बात सुनकर च्यवन ऋषि ने कहा कि-पुत्र यह तुमने अच्छा नहीं किया, ऐसा कर तुमने भी पाप कमाया है, इसलिए तुम भी पापमोचनी एकादशी का व्रत करें।" पापमोचनी एकादशी शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च को सुबह 8.11 बजे शुरू होकर 15 मार्च की सुबह 9.17 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार 15 मार्च 2026 रविवार को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत का पारण 16 मार्च को द्वादशी तिथि पर किया जाएगा। पापमोचनी एकादशी पारण समय सामान्यजन पापमोचनी एकादशी का पारण 16 मार्च के दिन करेंगे। पारण का समय 16 मार्च को सुबह 6.30 बजे से 8.54 बजे के बीच किया जाना शुभ है। इस दौरान साधक विधिवत लक्ष्मीनारायण की पूजा करें। इसके बाद अन्न का दान कर एकादशी का व्रत खोलें।

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