एमएसएमई सुधारों का नया युग

एमएसएमई सुधारों से विकास को नई गति

हाल ही में संसद द्वारा पारित एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक, 2026 से उद्यमों के विकास में नई गति मिलेगी। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

By : नरेंद्र कुमार
एमएसएमई सुधारों से विकास को नई गति

संसद के दोनों सदनों में हाल ही में पारित किया गया सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक, 2026 एक महत्वपूर्ण बदलाव है। एमएसएमई राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज 'उद्यम पंजीकरण पोर्टल' पर 9 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं, जो 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। एमएसएमई हमारी आर्थिकी में 31 प्रतिशत तथा निर्यात में 50 प्रतिशत योगदान देते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में एमएसएमई क्षेत्र की प्रमुख भागीदारी है। एमएसएमई भारत के विकास के सूत्रधार हैं।

वर्ष 2020 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण को अधिक व्यापक और समावेशी बनाया गया। इसके तहत टर्नओवर और निवेश, दोनों पर आधारित समग्र मानदंड विकसित किया गया। वर्ष 2025 में निवेश सीमा ढाई गुना बढ़ाकर क्रमशः ढाई करोड़, 25 करोड़ और 125 करोड़ रुपये की गई तथा टर्नओवर सीमा को दो गुना बढ़ाकर क्रमशः 10 करोड़, 100 करोड़ और 500 करोड़ रुपये किया गया। इससे उद्यमों को पूंजी निवेश बढ़ाने, विकास करने और तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

वित्त की उपलब्धता एमएसएमई क्षेत्र के विकास का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। मंत्रालय बैंक ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत रहा है। एमएसएमई को प्रदान किया गया बकाया ऋण वर्ष 2014-15 में 10 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38 लाख 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट के माध्यम से सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दिए जाने वाले ऋण पर गारंटी उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2000 से 2022 के बीच दी गई क्रेडिट गारंटी 3 लाख 14 हजार करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच बढ़कर 10 लाख 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2014-15 से अब तक लगभग 8 लाख 34 हजार सूक्ष्म उद्यमों को 24 हजार 903 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी दी गई है, जिससे अनुमानित 75 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

एमएसएमई मंत्रालय की सार्वजनिक खरीद नीति के अंतर्गत केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सालाना 25 प्रतिशत खरीद करना अनिवार्य है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सार्वजनिक खरीद का मूल्य 40,717 करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,15,801 करोड़ रुपये हो गया। इसमें अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के स्वामित्व वाले उद्यमों से 3,984 करोड़ रुपये तथा महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले उद्यमों से 9,059 करोड़ रुपये की खरीद हुई है।

एमएसएमई को समय पर भुगतान दिलाने के लिए मंत्रालय ने कई सार्थक प्रयास किए हैं। ट्रेड्स इनमें से एक है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित यह डिजिटल मंच वर्ष 2017 में एमएसएमई की नकदी संबंधी चुनौतियों तथा कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। ट्रेड्स मंच ने मार्च 2026 तक 8,71,000 करोड़ रुपये की इनवॉइस डिस्काउंटिंग के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र को समय पर भुगतान दिलाया है। ट्रेड्स से जुड़े एमएसएमई की संख्या अप्रैल 2022 में 34,430 थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 2,55,000 से अधिक हो गई है।

विलंबित भुगतान और उससे जुड़े विवादों के निपटारे के लिए पूरे देश में 161 सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषदें स्थापित की गई हैं। संशोधन में राज्यों को इन परिषदों की संरचना तय करने तथा आवश्यकतानुसार अधिक परिषदों का गठन करने के लिए सक्षम बनाया गया है। यह संशोधन ऑनलाइन विवाद समाधान को भी सक्षम बनाता है, ताकि संबंधित पक्ष अपने विवादों का समयबद्ध और किफायती तरीके से समाधान कर सकें।

एमएसएमई मंत्रालय महिला उद्यमियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। आज उद्यम पोर्टल पर 39 प्रतिशत से अधिक एमएसएमई महिलाओं के स्वामित्व में हैं। लगभग 3.38 करोड़ एमएसएमई महिलाओं के स्वामित्व में हैं। क्रेडिट गारंटी योजना के तहत महिलाओं के लिए 90 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज और वार्षिक गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 25 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों का विकास भी मंत्रालय की प्राथमिकता है। उद्यम पोर्टल पर 1.24 करोड़ से अधिक एमएसएमई ऐसे उद्यमियों के स्वामित्व में हैं।

मंत्रालय की इन पहलों को और सशक्त बनाने के लिए एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया गया है। इसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का समाधान करना, प्रशासनिक ढांचे में सुधार करना, व्यापार करने में सुगमता और नियमों के अनुपालन को बढ़ावा देना है। इसके तहत एमएसएमई के निःशुल्क एवं स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय डिजिटल मंच की व्यवस्था, टर्नओवर और निवेश आधारित वर्गीकरण को वैधानिक रूप देना तथा एमएसएमई की नकदी संबंधी समस्याओं का समाधान शामिल है। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए एमएसएमई से खरीद के इनवॉइस का निपटान ट्रेड्स के माध्यम से करना अनिवार्य किया गया है।

राज्यों को अधिक सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषदें करने तथा भुगतान में देरी से जुड़े विवादों के त्वरित निपटारे के लिए समय-सीमा तय करने की सुविधा दी गई है। मध्यस्थता से हुए समझौते या पंचाट निर्णय की वसूली भूमि राजस्व के बकाये के रूप में करने की व्यवस्था भी की गई है। यदि डिक्री, पंचाट निर्णय या आदेश को रद्द करने का आवेदन छह महीने से अधिक समय से लंबित है, तो अदालतों को एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं को निर्णयित राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश देने का अधिकार दिया गया है। कुछ प्रावधानों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से हटाकर अलग-अलग स्तर के दंड की व्यवस्था की गई है, जिसमें पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी भी शामिल है।

यह संशोधन हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श और संबंधित मुद्दों की सावधानीपूर्वक जांच के बाद किया गया है। समावेशी, टिकाऊ और रोजगार-प्रधान आर्थिक विकास के लिए मजबूत एमएसएमई क्षेत्र आवश्यक है। ये संशोधन 'विकसित भारत 2047' के विजन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं। इससे उद्यमों के औपचारिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, उनके विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा और वे विकास के 'चैंपियन' बन सकेंगे।

सुश्री शोभा करंदलाजे
लेखिका केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।

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