Modi’s ‘Roti Beti Mati’ Slogan in Bengal

बंगाल में ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नया नारा

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नया नारा दिया। इसे ममता बनर्जी के ‘मा-माटी-मानुष’ नारे के जवाब और चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

By : स्वदेश डेस्क
बंगाल में ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नया नारा

चुनाव आयोग ने रविवार को असम, केरलम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया है। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 व 29 अप्रैल को मतदान होगा जबकि शेष चार राज्यों में मतदान एक ही चरण में नौ अप्रैल को होगा लेकिन सभी राज्यों के चुनाव परिणाम एक साथ चार मई को आएंगे। इन राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही आज किया गया है लेकिन सभी राजनीतिक दल पहले से ही चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। इसी क्रम में

शनिवार को विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण करने पश्चिम बंगाल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने में 'रोटी-बेटी-माटी' का नया नारा देकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कटघरे खड़ा कर दिया। दरअसल ममता बनर्जी ने वामपंथियों के 34 साल पुराने गढ़ को अपने एक जादुई नारे 'मा-माटी-मानुष' के दम पर ध्वस्त किया था। इसी नारे की बदौलत वह लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी लेकिन अब बंगाल के चुनावी रण में ममता का तिलिस्म तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'रोटी बेटी-माटी' का ब्रह्मास्त्र चल दिया है। 

यह कोई तुकबंदी नहीं है। इसके पीछे एक बहुत गहरी और सोची-समझी रणनीति है। राजनीति में जब एंटी इनकमबेसी चरम पर होती है तो पुराने नारे अपना असर खोने लगते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता की रैली में सबसे पहला वार इसी बात पर किया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि जिस 'मां-माटी-मानुष के नाम पर टीएमसी सता में आई थी। आज वह पूरी तरह विफल है। उन्होंने इस नारे की जमीनी हकीकत बताते हुए कहा कि आज बंगाल में मां रो रही है, माटी को लूटा जा रहा है और बंगाली मानुष अपना ही राज्य छोड़ने पर मजबूर हो रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान आम बंगाली को ये अहसास दिलाने की कोशिश है कि जिस नारे पर उसने आआंख बंद करके भरोसा किया था वह असल में एक राजनीतिक छलावा था। ममता बनर्जी के नारे को खारिज करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जो नया नारा दिया है वह हवा-हवाई नहीं है। यह सीधे आम आदमी के पेट, परिवार और प्रॉपर्टी से जुड़ा मामला है। कांग्रेस, वामपंथी, टीएमसी ने हमेशा घुसपैठियों का साथ देकर यहां की 'रोटी-बेटी माटी को खतरे में डाला और दशकों तक मूल निवासियों को उनकी ही जमीन के हक से दूर रखा। 

मोदी ने कहा कि घुसपैठियों की वजह से आज स्थानीय लोगों का रोजगार छिन रहा है। जब बाहर से अवैध रूप से लोग आकर बसते हैं तो वे सस्ते मजदूर बन जाते हैं और स्थानीय संसाधनों पर कब्जा कर लेते हैं। इसका सीधा नुकसान राज्य के मूल निवासी चाहे वे हिन्दू हो या मुसलमान सभी को उठाना पड़ता है। रोटी शब्द उस युवा और उस गरीब पिता की हताशा को जुबान दे रहा है जो दिन-रात पसीना बहाने के बाद भी अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहा है। बंगाल में बेटी की सुरक्षा का सवाल भी सबसे धारदार और मारक पहलू है। किसी भी परिवार के लिए उसकी बेटी का सम्मान और सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं होता। 

बंगाल एक ऐसा राज्य है जहां की कमान एक महिला मुख्यमंत्री के हाथ में है लेकिन फिर भी वहां बेटिया सेबसे ज्यादा असुरक्षित है। भाजपा संदेशखाली जैसी बहुचर्चित घटनाओं को आधार बनाकर यह साबित कर रही है कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद बंगाल में बेटियां हर के साए में जी रही हैं। इसी प्रकार माटी का मतलब सिर्फ एक टुकड़ा जमीन नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति, वजूद और अस्मिता है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बहुत ही गंभीर आरोप लगाया कि बंगाल के लोगों की जमीनों पर घुसपैठियों को कब्जा दिलाया जा रहा है। 

यह सीधा इशारा राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे डेमोग्राफी के बदलाव की तरफ है। मोदी ने चेतावनी दी कि कई क्षेत्रों में डेमोग्राफी पूरी तरह बदल गई है और बंगाली हिन्दू अपने ही घर में अल्पसंख्यक बन रहे हैं। यह लोगों को एक साथ लाने की कोशिश है।

 

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