Yogi Adityanath's Governance

योगी युगः संन्यासी से सुशासन के शिखर तक

Yogi Adityanath's leadership has transformed Uttar Pradesh, focusing on infrastructure and law and order, marking a significant shift in the state's development.

By : नरेंद्र कुमार
योगी युगः संन्यासी से सुशासन के शिखर तक

डीडी पाण्डेय

आज उत्तर प्रदेश विश्व पटल पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहा है। प्रदेश में बिगड़ी कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाकर सुधारों की जो गाड़ी आगे बढ़ी, उसमें निःसंदेह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अथक परिश्रम और असीम ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है। आज निवेशकों का भरोसा उत्तर प्रदेश पर लौटा है और निवेशकों की पसंद में प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है।

साधारण, संयमित और सरल जीवन जीने वाले तथा भगवा वस्त्र धारण करने वाले योगी आदित्यनाथ का 1994 में गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में शुरू हुआ सफर उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने तक संघर्षों से भरा रहा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में दबे-कुचले, शोषित और वंचित वर्गों की आवाज बनने का उनका जुनून उन्हें जनआंदोलनों के रास्ते पर ले गया। संभवतः उस समय उन्हें भी यह आभास नहीं था कि यही रास्ता उन्हें एक दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाएगा।पूर्वी उत्तर प्रदेश उस दौर में ऐसे नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रहा था, जो अन्याय, अत्याचार और उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष का साहस रखता हो। ऐसे समय में 1994 में गोरखनाथ की धरती पर गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में एक योगी का उदय हुआ।

1998 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन सांसद महंत अवैद्यनाथ ने चुनाव लड़ने में असमर्थता जताई और योगी आदित्यनाथ का नाम आगे बढ़ाया। यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई। उन्होंने नामांकन दाखिल किया और राजनीति के पथ पर आगे बढ़ते गए। 1998 से मार्च 2017 तक वे लगातार गोरखपुर से सांसद रहे और हर चुनाव में उनकी जीत का अंतर बढ़ता गया। वर्ष 2017 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।जब समाज में जन-जन की आवाज बनने वाले एक संगठन की आवश्यकता महसूस हुई, तब योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी की स्थापना की। यह संगठन हिंदू युवाओं का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह है। 1998 में इसके गठन के बाद कुछ ही वर्षों में यह संगठन कमजोर, पीड़ित और उपेक्षित वर्गों की आवाज के रूप में स्थापित हो गया।

आज योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उनके समर्थकों का मानना है कि यह उनकी यात्रा का केवल एक पड़ाव है। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति उन्हें आगे भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास ग्रहण किया। योगी आदित्यनाथ को पशु-पक्षियों से विशेष लगाव है। विशेष रूप से गाय, कुत्ते, बिल्ली और बंदरों के प्रति उनका स्नेह अक्सर चर्चा में रहता है।उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी ने जब योगी आदित्यनाथ को अपना नेता चुना, तब शायद ही किसी ने अनुमान लगाया होगा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश से उभरा यह नेता प्रदेश के विकास की नई इबारत लिखेगा।बतौर मुख्यमंत्री एक कार्यकाल पूरा कर और दूसरे कार्यकाल के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुके योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पूर्वांचल का वह इलाका, जो कभी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करता था, आज विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। उनकी सक्रियता के परिणामस्वरूप गोरखपुर में एम्स जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था की स्थापना हुई।

योगी आदित्यनाथ ने विकास के एजेंडे को नया स्वरूप दिया है। प्रदेश के सर्वांगीण विकास के प्रति समर्पित नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ा है। कानून-व्यवस्था में सख्ती के साथ बदलाव की बयार महसूस की गई। राज्य में ऐसा वातावरण तैयार हुआ, जिससे उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा।देश के राज्यों में पूंजीगत व्यय के पैमाने पर उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। बेहतर बुनियादी ढांचे और निर्बाध बिजली आपूर्ति से लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। उनकी कार्यशैली कई मायनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेल खाती है। उन्होंने स्वयं को चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित किया है।योगी आदित्यनाथ स्वयं कहते हैं, "मैं पूर्णकालिक राजनेता नहीं, बल्कि एक संन्यासी हूं, जिसने जनता की सेवा के लिए राजनीति का मार्ग चुना है। मेरा कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं है। मेरी प्राथमिकता लोक कल्याण संकल्प पत्र का प्रभावी क्रियान्वयन है।"

वे यह भी कहते हैं, "हम घबराते नहीं हैं। जब हम अकेले माफिया के खिलाफ लड़ रहे थे, तब भी नहीं घबराए। इंसेफेलाइटिस के खिलाफ लड़ाई में भी हम नहीं घबराए।"योगी आदित्यनाथ एक राजनेता भी हैं और संन्यासी भी। उनकी पहचान बेबाक और स्पष्टवादी नेता के रूप में रही है। जो उनके मन में होता है, वह अक्सर उनकी वाणी में भी दिखाई देता है। वे 1998 से 2017 तक लगातार गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतते रहे और प्रत्येक चुनाव में उनका जीत का अंतर बढ़ता गया। उन्हें किसी भी चुनाव में पराजय का सामना नहीं करना पड़ा।करीब 14 वर्षों तक विपक्ष में रहने के बाद उत्तर प्रदेश में सत्ता में लौटी भारतीय जनता पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया। भाजपा के इतिहास में वे पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने दूसरे कार्यकाल के तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल भी सफलतापूर्वक पूरा किया है।

प्रयागराज में आयोजित भव्य कुंभ, अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति तथा निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित सफल इन्वेस्टर्स समिट उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती हैं। उत्तर प्रदेश के विकास कार्यों की चर्चा अब राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी है।कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए माफिया और अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की चर्चा अन्य राज्यों तक पहुंची। वहीं तेज गति से हो रहे बुनियादी ढांचा विकास को भी विभिन्न मंचों पर उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन की चर्चा लगातार होती रही है। एक केंद्रीय मंत्री ने सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्हें "इन्फ्रास्ट्रक्चर मैन ऑफ इंडिया" तक की उपाधि दी थी। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में जिस गति से विकास कार्य हो रहे हैं, वह देश के लिए एक उदाहरण है।आज योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास के एक प्रमुख प्रतीक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उनके प्रयासों की चर्चा देशभर में हो रही है।

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