भारत में बुलेट ट्रेन से सफर करने का सपना अब हकीकत के करीब पहुंच रहा है। देश की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन B28 का निर्माण बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) के प्लांट में किया जा रहा है। इस ट्रेन को अधिकतम 280 किलोमीटर प्रति घंटे की टेस्ट स्पीड के लिए डिजाइन किया गया है। रेलवे की योजना है कि इसके ट्रायल रन 2027 में शुरू किए जाएं और अगस्त 2027 से मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-वापी सेक्शन पर यात्री सेवा शुरू की जाए।
280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से होगी जांच
भारत की स्वदेशी बुलेट ट्रेन को B28 नाम दिया गया है। इसकी डिजाइन और टेस्ट स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जबकि शुरुआती परिचालन गति लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। ट्रेन को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले कई चरणों में परीक्षण किया जाएगा। इसमें तकनीकी जांच, सुरक्षा परीक्षण, डिपो टेस्टिंग और मुख्य रेल ट्रैक पर ट्रायल शामिल हैं।
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नवंबर की शुरुआत में बेंगलुरु स्थित BEML प्लांट का दौरा कर ट्रेन के निर्माण कार्य का जायजा लिया था। इस दौरान ट्रेन के कोच की मजबूती जांचने के लिए स्क्वीज टेस्ट भी किया जा रहा था। इस परीक्षण में कोच की बॉडी पर नियंत्रित दबाव डालकर उसकी संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा का आकलन किया जाता है।
पहले सूरत से वापी के बीच दौड़ेगी ट्रेन
देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर विकसित की जा रही है। इसकी कुल लंबाई करीब 508 किलोमीटर है। हालांकि, शुरुआत में पूरे कॉरिडोर पर ट्रेन नहीं चलेगी। पहले चरण में गुजरात के सूरत से वापी के बीच लगभग 97 से 100 किलोमीटर के सेक्शन पर यात्री सेवा शुरू करने की योजना है।
रेलवे की तैयारी के मुताबिक, इस सेक्शन पर 2027 की पहली छमाही में ट्रायल रन शुरू हो सकते हैं। इसके बाद परीक्षण और जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लक्ष्य अगस्त 2027 में इस रूट पर व्यावसायिक यात्री सेवा शुरू करना है। यह समयसीमा निर्धारित योजना है, अंतिम शुरुआत परीक्षण और सुरक्षा मंजूरी पर निर्भर करेगी।
8 कोच वाली होगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन
B28 ट्रेनसेट में कुल आठ कोच होंगे। इसमें करीब 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। ट्रेन को भारतीय परिस्थितियों और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें आधुनिक एयर कंडीशनिंग, आरामदायक सीटें, इंफोटेनमेंट सिस्टम और दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।
इस ट्रेन का निर्माण BEML और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के सहयोग से किया जा रहा है। शुरुआती चरण में दो स्वदेशी ट्रेनसेट तैयार किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य हाई-स्पीड रेल तकनीक के क्षेत्र में भारत की घरेलू निर्माण क्षमता को मजबूत करना है।
जापान पर निर्भरता कम करने की कोशिश
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की शिंकानसेन तकनीक की अहम भूमिका रही है। हालांकि, स्वदेशी B28 ट्रेनसेट तैयार करने का फैसला भारत में हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में ऐसी ट्रेनों के निर्माण और रखरखाव में देश की क्षमता बढ़ सकती है।
B28 के निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया जारी है। यदि तय कार्यक्रम के अनुसार सभी तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे हो जाते हैं, तो अगस्त 2027 में देश के पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के एक हिस्से पर आम यात्रियों को हाई-स्पीड रेल से सफर करने का मौका मिल सकता है।