सिक्किम में बादल फटने से तीस्ता नदी में बढ़ा जलस्तर, बाढ़ के प्रकोप से 30 की मौत
सिक्किम। 3 अक्टूबर को बादल फटने के बाद तीस्ता नदी में बाढ़ के कहर से आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या शुक्रवार तक 30 हो गई जिसमें 7 भारतीय सेना के जवान भी हैं । लोगों को बचाने उर राहत कार्य के लिए भारतीय वायुसेना का रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। गौरतलब है कि बुरदांग इलाके से लापता हुए सेना के 23 जवानों में से 7 के शव नदी के निचले इलाकों से बरामद कर ली गई है । लापता जवानों में से एक को बचा लिया गया है। 15 जवान समेत कुल 143 लोग अभी भी लापता हैं। इन सभी लापता लोगों को ढूंढने के लिए NDRF, SDRF और वायुसेना के हेलिकॉप्टर प्रयासरत हैं। लापता लोगों की संख्या कल 142 थी, जो आज घटकर 81 हो गई है।
सिक्किम के अलग-अलग इलाकों में बाढ़ की वजह से लोग फंसे हुए हैं। बादल फटने और तीस्ता में उफान की वजह से तकरीबन 7000-8000 लोगों के फंसे होने की आशंका है । जिनमें से 3,000 से अधिक पर्यटकों के फंसे होने का अंदेशा जताया जा रहा है। करीब 3 हजार लोग लाचेन और लाचुंग में फंसे हैं इनमें से ज्यादातर बाइकर्स हैं और 700-800 ड्राइवर हैं । सभी को निकालने की कोशिश जारी है। चुंगथांग में तीस्ता स्टेज 3 बांध में काम करने वाले 14 मजदूर अभी भी बांध की सुरंगों में फंसे हुए हैं।बाढ़ के हालात देखते हुए शिक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर तक सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अब तक मंगन जिले में 4 और गंगटोक जिले में 6 लोगों की मौत हुई है। पाकिम जिले में 19 लोगों की मौत हुई, जिनमें सेना के 9 जवान भी शामिल हैं। नामची जिले में अभी तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन आज 1 व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है।
इस बाढ़ की वजह से सिक्किम के चार जिलों मंगन, गंगटोक, पाक्योंग और नामची को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है । इस क्षेत्र के 22 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। इन जिलों में पानी की पाइपलाइन, सीवेज लाइन और 250 से ज्यादा घर टूट गए हैं। 11 ब्रिज भी तबाह हो गए हैं। यही बाढ़ इतना भयसंकर है कि सिक्किम से लगे पश्चिम बंगाल के तीन जिले- जलपाईगुड़ी, कलिमपोन्ग और कूचबिहार में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं । सिक्किम में सैकड़ों गांव मुख्य मार्गों से कट चुके हैं। दिखचू, सिंगतम और रांगपो शहर पानी में डूब गए हैं।
तीस्ता नदी के बाढ़ से लोगों को बचाने के लिए भारतीय वायुसेना का आपदा अभियान जब से बदल फट है उस दिन से जारी है है। वायु सेना का कहना है की रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। तबाही कितनी बड़ी है इस बात से समझ जा सकता है कि सैनिकों को उतारने के लिए कोई जगह नहीं मिल पा रही है। एमआई-17 1 वी हेलिकॉप्टरों को आपदा अभियानों के लिए विशेष रूप से लगाया गया है। इस हेलिकॉप्टर खासियत ये है कि इसके अंदर स्ट्रेचर का उपयोग किया जा सकता है।
बता दें कि 3 अक्टूबर को बदल फटने को लेकर वैज्ञानिकों को आशंका है कि नेपाल में आए भूकंप से सिक्किम की ल्होनक झील टूटी जिसका दायरा अब एक तिहाई रह गया है । जब बादल फटा तो झील इतना पानी रोक नहीं पाई। इससे तीस्ता नदी में बाढ़ आ गई। नदी का जलस्तर 15 से 20 फीट तक बढ़ गया। नदी से लगे इलाके में ही आर्मी कैंप था, जो बाढ़ में बह गया और यहां खड़ी 41 गाड़ियां डूब गईं।
10 सेकंड में, 13,000 करोड़ रुपए के तीस्ता-3 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का 60 मीटर ऊंचा बांध लहोनक झील से आई बाढ़ से पूरी तरह बह गया। बाढ़ में सिक्किम को देश से जोड़ने वाला नेशनल हाईवे भी एनएच-10 भी बह गया।
राज्य सरकार ने इस घटना को आपदा घोषित किया है। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम के हालात जानने के लिए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से बातचीत की। उन्हें मदद देने का आश्वासन दिया।
गौरतलब है कि शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दो साल पहले ही चेतावनी दी थी कि सिक्किम में दक्षिण झील भविष्य में फट सकती है और निचले क्षेत्र को तबाह कर सकती है।