Iran Israel War Hits Nimar Banana Export

ईरान-इजराइल युद्ध का निमाड़ की खेती पर असर, बड़वानी-बुरहानपुर के केले के दाम आधे

ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र तक पहुंच गया है। बड़वानी और बुरहानपुर से मिडिल ईस्ट देशों को होने वाला केला निर्यात लगभग ठप हो गया है

By : स्वदेश डेस्क
ईरान-इजराइल युद्ध का निमाड़ की खेती पर असर, बड़वानी-बुरहानपुर के केले के दाम आधे

निमाड़ अंचल में मिर्च, केला और कपास लंबे समय से नकदी फसल के रूप में किसानों के लिए आर्थिक संबल बने हुए हैं। बड़वानी और बुरहानपुर जिले अपने मीठे स्वाद वाले केले के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचान रखते हैं। लेकिन ईरान-इजराइल युद्ध ने बड़वानी के साथ ही बुरहानपुर के किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि केले के दाम करीब 50 फीसदी तक गिर गए हैं।

खाड़ी देशों में बढ़े तनाव का असर

ईरान-इजराइल युद्ध और खाड़ी देशों में बढ़े तनाव का असर अब इंदौर और भोपाल जैसे बड़े स्थानीय बाजारों तक भी दिखाई देने लगा है। बड़वानी-बुरहानपुर में केला ले जाने वाले वाहनों के पहिये थम गए हैं। रमजान के महीने में जहां केले की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है, वहीं इस बार निर्यात प्रभावित होने से किसानों को अपनी फसल कम दामों पर बेचनी पड़ रही है।

फसल तैयार, खरीदार नदारद

स्थानीय किसानों रामभरोस और पांछीलाल का कहना है कि कुछ दिन पहले तक केले का भाव करीब 25 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा था, लेकिन निर्यात प्रभावित होने के बाद कीमतों में भारी गिरावट आई है। अब कई जगह किसानों को 8 से 9 रुपये प्रति किलो के भाव पर ही माल बेचना पड़ रहा है।फसल तैयार है, लेकिन खरीदार कम होने के कारण किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

दुबई, तुर्की, बहरीन, ईरान, इराक और इजराइल में होती थी आपूर्ति

निमाड़ अंचल में नर्मदा नदी के किनारे बसे बड़वानी जिले की उपजाऊ जमीन और पर्याप्त पानी केले की खेती के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं। इसी वजह से यहां बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता का केला पैदा होता है।हर साल यहां से बड़ी मात्रा में केला ईरान, इराक, इजराइल, बहरीन, तुर्की और दुबई समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों में निर्यात किया जाता रहा है। निर्यात के कारण किसानों को अच्छे दाम मिलते थे और यह क्षेत्र केले की खेती के लिए तेजी से प्रसिद्ध हुआ।

बड़े शहरों में भी नहीं मिल रहे बेहतर दाम

बड़वानी से बड़ी मात्रा में केला सीधे मिडिल ईस्ट के देशों में भेजा जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में निर्यात लगभग ठप पड़ गया है। इससे स्थानीय बाजारों में केले की आपूर्ति बढ़ गई है।अब यह केला दिल्ली, ग्वालियर और अन्य बड़े शहरों के बाजारों में भेजा जा रहा है, लेकिन वहां पहले से ही पर्याप्त आपूर्ति होने के कारण कीमतों में ज्यादा सुधार नहीं हो पा रहा है।बड़वानी और बुरहानपुर के हजारों किसान पूरी तरह केले की खेती पर निर्भर हैं, इसलिए वे आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य हों और निर्यात दोबारा शुरू हो, ताकि बाजार में मांग बढ़े और उन्हें अपनी फसल के बेहतर दाम मिल सकें।

 

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