सेवा तीर्थ से संचालित होगा PMO

बदल गया PMO का पता, अब 'सेवा तीर्थ' से चलेगी देश की सरकार, PM मोदी ने किया उद्घाटन

पीएम मोदी ने सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। अब पीएमओ, एनएससीएस और कैबिनेट सचिवालय एकीकृत आधुनिक कैंपस से संचालित होंगे।

By : संजय मिश्रा
बदल गया PMO का पता, अब 'सेवा तीर्थ' से चलेगी देश की सरकार, PM मोदी ने किया उद्घाटन

PM modi Inaugurated New PMO

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स का उद्घाटन किया। यानी आज से पीएम मोदी नए प्रधानमंत्री ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने जा रहे हैं, जहां से वे अपना नया कार्यालय संचालित करेंगे। दोपहर करीब 1:30 बजे उन्होंने ‘सेवा तीर्थ’ नाम का औपचारिक अनावरण किया और इसी के साथ देश की सत्ता का संचालन अब नए परिसर से शुरू होगा।

दक्षिण ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक

उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने उसी दिन साउथ ब्लॉक में केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक की अध्यक्षता की। ब्रिटिश काल में बने इस सचिवालय भवन में यह अंतिम कैबिनेट बैठक रही, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थानांतरण नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में कर दिया जाएगा।

औपनिवेशिक छाप से आधुनिक कार्यशैली तक

सरकार का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ इमारत बदलने भर का नहीं है, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। करीब सवा सौ साल पुराने ब्रिटिश प्रभाव से बाहर निकलकर आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत की कार्यप्रणाली को मजबूती देने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है।

नए परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय को एक साथ स्थान दिया गया है। पहले ये अलग-अलग इमारतों में संचालित होते थे, जिससे समन्वय में दिक्कतें आती थीं।

नामों में बदलाव, सोच में परिवर्तन

पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कई ऐतिहासिक स्थलों और इमारतों के नाम बदले हैं। साउथ ब्लॉक को सेवा तीर्थ, सेंट्रल सचिवालय को कर्तव्य भवन, राजपथ को कर्तव्य पथ, रेस कोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग और राज भवन/राज निवास को लोक भवन/लोक निवास के रूप में नया नाम दिया गया। सरकार के मुताबिक ये बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच और सार्वजनिक भागीदारी में बदलाव को दर्शाते हैं।

बिखरे दफ्तरों से एकीकृत कैंपस तक

दशकों से केंद्र सरकार के कई अहम मंत्रालय और कार्यालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग जर्जर भवनों में काम कर रहे थे। इस बिखराव के कारण तालमेल की कमी, बढ़ती रखरखाव लागत और कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण की कमी जैसी समस्याएं सामने आती थीं।

नए सेवा तीर्थ परिसर में इन सभी दफ्तरों को एकीकृत कर आधुनिक सुविधाओं से लैस वातावरण में काम करने की व्यवस्था की गई है। इससे मंत्रालयों के बीच समन्वय और निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने की उम्मीद जताई जा रही है।

वास्तुकला: दो युगों का अंतर

1910 से 1930 के बीच बने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अपनी भव्यता और स्थापत्य कला के लिए जाने जाते रहे हैं। ऊंचा प्लिंथ, विशाल स्तंभ, गुंबद, मेहराब और लाल-बफ सैंडस्टोन उस दौर की पहचान थे। हालांकि इन इमारतों में ब्रिटिश साम्राज्यवाद की झलक भी दिखाई देती थी।

इसके विपरीत, सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का डिजाइन सादगी, पारदर्शिता और कार्यकुशलता पर आधारित है। यहां औपनिवेशिक भव्यता की जगह आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है।

क्या है नए परिसर की खासियत?

कर्तव्य भवन-1 और 2 में डिजिटल तकनीकों से लैस दफ्तर, जनता से संवाद के लिए पब्लिक एरिया और सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन की सुविधा दी गई है। इमारतों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, वाटर कंजर्वेशन, वेस्ट मैनेजमेंट और ऊर्जा दक्ष निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव कम हो और कार्यक्षमता बढ़े। सुरक्षा के लिहाज से स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम भी लगाए गए हैं, ताकि अधिकारियों और आगंतुकों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

ओपन फ्लोर मॉडल पर नया PMO

नया प्रधानमंत्री कार्यालय अब  'ओपन फ्लोर' मॉडल पर बनाया गया है। पहले की तरह बंद कमरों और ऊंची दीवारों वाला ढांचा नहीं है, बल्कि खुले और आपस में जुड़े कार्यक्षेत्र तैयार किए गए हैं। इससे अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल और तेज कामकाज संभव होगा। प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और बड़े बैठक कक्ष भी नए स्वरूप में तैयार किए गए हैं। यहां विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ उच्चस्तरीय बैठकों की आधुनिक सुविधा उपलब्ध है।

यह परिसर आधुनिक तकनीक से लैस होने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक भी प्रस्तुत करता है। पारंपरिक भारतीय सौंदर्य और आधुनिक वास्तुकला का संतुलन इसे विशिष्ट पहचान देता है।

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