राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक शुक्रवार को संपन्न हुई। विशाखापट्टनम के समीप गुडिलोवा स्थित विज्ञान विहार में आयोजित बैठक के बाद सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंद ने बताया कि तीन दिनों तक विभिन्न संगठनों के कार्यों की समीक्षा, अनुभवों के आदान-प्रदान और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई। युवाओं और विद्यार्थियों तक मादक पदार्थों की बढ़ती पहुंच पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बनेगा। इसमें शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों, प्रशासन और पुलिस, सभी की साझी भूमिका आवश्यक है।
बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों में बदलते जनसंख्या अनुपात और घटती प्रजनन दर से उत्पन्न सामाजिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। समाज में संतुलन और सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर और प्रदीप जोशी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
32 संगठनों के 326 प्रतिनिधि उपस्थित रहे
बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित 32 संगठनों के 326 प्रतिनिधि, जिनमें 49 महिलाएं शामिल थीं, ने आगामी कार्ययोजना पर मंथन किया। वहीं, संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर देशभर में होने वाले सामाजिक समरसता कार्यक्रमों की भी समीक्षा हुई। असम की बाढ़ के दौरान राष्ट्रीय सेवा भारती, भारतीय किसान संघ, नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन और आरोग्य भारती सहित कई संगठनों के राहत कार्यों की समीक्षा की गई।
युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर हुआ विमर्श
बैठक में युवाओं की आकांक्षाओं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को विशेष महत्व दिया गया। बताया गया कि इस वर्ष संघ के 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में लगभग 21 हजार युवाओं ने भाग लिया, जबकि दैनिक शाखाओं में 60 प्रतिशत से अधिक स्वयंसेवक युवा हैं। शताब्दी वर्ष के संदर्भ में पंच परिवर्तन अभियान के तहत कुटुंब प्रबोधन, जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे विषयों को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर बल दिया गया।
एआई के जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा
बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसके सकारात्मक उपयोग के साथ संभावित दुष्प्रभावों पर चर्चा करते हुए भारतीय सामाजिक संदर्भ में तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया। संघ प्रेरित संगठनों के कार्यों के विस्तार और समाज केंद्रित चिंतन को अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाने की रणनीति पर भी विचार किया गया।