CM सरमा केस: SC ने सुनवाई से किया इनकार

CM सरमा शूटिंग वीडियो केस में SC सख्त, हाईकोर्ट जाने को कहा

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा के वायरल शूटिंग वीडियो पर SC ने सुनवाई से इनकार कर याचिकाकर्ताओं को गुवाहाटी HC जाने को कहा।

By : संजय मिश्रा
CM सरमा शूटिंग वीडियो केस में SC सख्त, हाईकोर्ट जाने को कहा

नई दिल्लीः  असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े विवादित शूटिंग वीडियो मामले में  दायर याचिकाओं पर में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया। कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता पहले संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पूछा कि जब मामला असम से जुड़ा है तो सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आया गया। अदालत ने कहा कि हर मामले में सीधे शीर्ष अदालत पहुंचना एक “परेशान करने वाला ट्रेंड” बनता जा रहा है।

बेंच ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट की संवैधानिक ताकत को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आप हाईकोर्ट्स का हौसला तोड़ रहे है।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

याचिकाकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर वायरल उस वीडियो का हवाला दिया, जिसमें मुख्यमंत्री को टारगेट शूटिंग करते हुए दिखाया गया था। याचिका में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की गई थी।

यह भी कहा गया कि वीडियो और उससे पहले दिए गए कुछ बयानों से एक समुदाय विशेष को लेकर विवाद पैदा हुआ है।

अभिषेक मनु सिंघवी की दलील

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मामले की सुनवाई करे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक वीडियो का मामला नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है।

चीफ जस्टिस की “हाईकोर्ट का हौसला तोड़ने” वाली टिप्पणी पर सिंघवी ने पलटवार करते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री के कथित कृत्य संविधान और एक पूरे समुदाय का मनोबल गिरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

‘सुप्रीम कोर्ट शॉपिंग’ पर नाराजगी

बेंच ने साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट 'शॉपिंग के लिए आसान जगह' नहीं बन सकता। सिर्फ इसलिए कि यहां वरिष्ठ वकील उपलब्ध हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हर याचिका सीधे यहीं दाखिल की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट को कमजोर बताने का कोई आधार नहीं है और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।

क्या है पूरा विवाद?

मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसे असम में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई द्वारा साझा किया गया था। वीडियो में मुख्यमंत्री टारगेट पर गोली चलाते दिखे थे। इसके अलावा, बंगाली भाषी मुसलमानों को लेकर दिए गए कुछ पुराने बयानों को भी याचिका में आधार बनाया गया।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए साफ कर दिया है कि याचिकाकर्ता पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख करें। अब आगे की कानूनी लड़ाई वहीं से शुरू होगी।

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