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पश्चिम बंगाल काउंटिंग विवाद पर TMC को झटका, सुप्रीम कोर्ट बोला- केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती चुनाव आयोग का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ TMC की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा- यह चुनाव आयोग का अधिकार है।

By : स्वदेश डेस्क
पश्चिम बंगाल काउंटिंग विवाद पर TMC को झटका, सुप्रीम कोर्ट बोला- केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती चुनाव आयोग का अधिकार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने काउंटिंग सेंटर्स पर केंद्रीय और PSU कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि मतगणना प्रक्रिया में कर्मचारियों की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इस मामले में अलग से कोई आदेश देने की जरूरत नहीं है।

4 मई को होने वाली मतगणना से पहले यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। TMC ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

चुनाव आयोग ने 13 अप्रैल 2026 को एक सर्कुलर जारी किया था। इसके तहत हर मतगणना टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पब्लिक सेक्टर यूनिट (PSU) से होना अनिवार्य किया गया था।TMC ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा था कि केवल केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती है। पार्टी की मांग थी कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट भी TMC की याचिका खारिज कर चुका था। हाईकोर्ट ने कहा था कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति पूरी तरह चुनाव आयोग का अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई बहस?

TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने अदालत में चार मुख्य मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने जिला चुनाव अधिकारियों को जारी सर्कुलर की जानकारी समय पर साझा नहीं की। साथ ही हर टेबल पर अतिरिक्त केंद्रीय कर्मचारी की जरूरत पर भी सवाल उठाए।सिब्बल ने कहा कि पहले से ही माइक्रो ऑब्जर्वर मौजूद हैं, ऐसे में एक और केंद्रीय अधिकारी की नियुक्ति क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं कर रहा।इस पर अदालत ने कहा कि नियमों के अनुसार काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट राज्य या केंद्र सरकार, दोनों में से किसी भी पूल से नियुक्त किए जा सकते हैं। इसलिए सर्कुलर को नियमों के खिलाफ नहीं कहा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि यह मानना गलत है कि केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी अलग-अलग श्रेणी के हैं। दोनों सरकारी कर्मचारी हैं और नियम चुनाव आयोग को चयन का अधिकार देते हैं।अदालत ने कहा कि अगर दोनों अधिकारी केंद्र सरकार से भी हों, तब भी यह नियमों के खिलाफ नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों की सहमति के आधार पर काउंटिंग स्टाफ तय नहीं किया जा सकता।अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 13 अप्रैल का चुनाव आयोग का सर्कुलर लागू रहेगा और इस पर किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि पूरी मतगणना प्रक्रिया रिटर्निंग ऑफिसर की निगरानी में होती है। हर उम्मीदवार के काउंटिंग एजेंट भी मौजूद रहते हैं, इसलिए गड़बड़ी की आशंका निराधार है।वहीं पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि किसी राजनीतिक दल को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि काउंटिंग में कौन शामिल होगा। यह अधिकार केवल चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के पास है।

बंगाल चुनाव पर क्यों अहम है यह फैसला?

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान हुआ था। अब 4 मई को मतगणना होनी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा संदेश माना जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से चुनाव आयोग की प्रशासनिक शक्तियों को मजबूती मिली है। वहीं TMC और बीजेपी के बीच चुनावी टकराव अब काउंटिंग के दिन और तेज होने की संभावना है।

 

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