संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले माहौल तनावपूर्ण हो गया… प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की के बाद रैपिड एक्शन फोर्स और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के हल्का बल प्रयोग गिया
जानकारी के मुताबिक, कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया. घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख 3 मांगें
- NEET और अन्य परीक्षा घोटालों की निष्पक्ष जांच।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।
- सरकारी भर्तियों में तेजी और बेरोजगारी पर ठोस कार्रवाई।
दिल्ली में धारा 163 लागू
संसद के मानसून सत्र और प्रस्तावित मार्च को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है। इसके तहत बिना अनुमति जुलूस, धरना और पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है. जंतर-मंतर, संसद मार्ग, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में थ्री-टियर सुरक्षा ग्रिड बनाया गया है। दिल्ली पुलिस के साथ पैरामिलिट्री फोर्स और रैपिड रिस्पॉन्स टीमें भी तैनात हैं।
दिल्ली पुलिस की चेतावनी
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि संसद मार्च के लिए किसी भी संगठन को अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत मार्च या जुलूस में शामिल न हों। पुलिस ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मेट्रो स्टेशनों पर बदली व्यवस्था
सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए राजीव चौक और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट समेत कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए गए थे। बाद में दोनों स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा और गेट दोबारा खोल दिए गए।
सोनम वांगचुक की हालत स्थिर
इधर, आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अभी भी सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनके सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेत स्थिर हैं, हालांकि लंबे उपवास के कारण उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।