जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात कई रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रही। लेकिन इस बैठक के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उस सवाल की हुई, जिसका जवाब ट्रंप ने सीधे तौर पर नहीं दिया। अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद जब ट्रंप से संवेदना व्यक्त करने को लेकर पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। इसके बाद इस मुद्दे ने भारत-अमेरिका संबंधों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी।
जियोपॉलिटिकल मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक बयान या प्रतिक्रिया के नजरिए से नहीं, बल्कि व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में समझने की जरूरत है।
मोदी ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया
चेलानी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान कमर्शियल जहाजों पर बढ़ते खतरों और उनमें काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। हालांकि उन्होंने तीन भारतीयों की मौत का उल्लेख सीधे तौर पर नहीं किया। बातचीत का फोकस समुद्री मार्गों की सुरक्षा और भारतीय क्रू सदस्यों की हिफाजत पर रहा, जो बड़ी संख्या में विदेशी जहाजों पर काम करते हैं।
संवेदना न जताने के पीछे क्या वजह बताई गई
ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि ट्रंप की प्रतिक्रिया में न तो सार्वजनिक संवेदना दिखाई दी और न ही अफसोस का कोई स्पष्ट संकेत मिला। उनके मुताबिक इसकी एक संभावित वजह यह हो सकती है कि भारतीय पक्ष ने औपचारिक रूप से न तो माफी की मांग उठाई और न ही पीड़ित परिवारों के लिए किसी तरह के मुआवजे का मुद्दा सामने रखा। ऐसे मामलों में कूटनीतिक बातचीत का स्वर आगे की प्रतिक्रिया को भी प्रभावित करता है।
The brief Trump-Modi meeting may not have reset strained U.S.-India ties, although both countries have a mutual interest in recalibrating relations given their shared strategic interests. The meeting came barely a week after U.S. attacks on commercial tankers killed three Indian…
रिश्तों में तनाव के बावजूद संवाद जारी
चेलानी ने यह भी कहा कि हाल के समय में भारत और अमेरिका के संबंध कुछ मुद्दों पर दबाव में जरूर दिखाई दिए हैं, लेकिन दोनों देशों के रणनीतिक हित अब भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसी कारण शीर्ष स्तर पर संवाद जारी है और दोनों पक्ष रिश्तों को नई दिशा देने में रुचि रखते हैं। जी-7 के दौरान हुई मुलाकात को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
हमले को लेकर एक्सपर्ट ने उठाए सवाल
चेलानी ने अमेरिकी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला कई स्तरों पर असामान्य प्रतीत होता है। उनके अनुसार अमेरिका को भारतीय बंदरगाहों पर शांति काल में लॉजिस्टिक सहयोग मिलता है। इसके बावजूद जिस जहाज पर भारतीय नागरिक मौजूद थे, उस पर हमला होने को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उनका मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
समुद्री सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा
यह मामला केवल तीन भारतीय नागरिकों की मौत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम कर रहे हजारों भारतीयों की सुरक्षा भी अब एक अहम कूटनीतिक विषय बन चुकी है। पश्चिम एशिया और अन्य संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के बीच भारत की चिंता इसी बात को लेकर है कि वैश्विक व्यापारिक जहाजों पर तैनात उसके नागरिक सुरक्षित रहें।