पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के स्कूलों में बड़ा बदलाव करते हुए ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य कर दिया है। अब सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में हर सुबह की सभा में छात्रों को राष्ट्रगीत गाना होगा। सरकार ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। स्कूल प्रबंधन को इसके पालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फैसले के बाद राज्य में शिक्षा, राष्ट्रवाद और समय प्रबंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
सुबह की प्रार्थना सभा में गूंजेगा ‘वंदे मातरम’
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों को आदेश जारी किया है कि कक्षाएं शुरू होने से पहले होने वाली सभा में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य होगा। निर्देश में कहा गया है कि हर छात्र की इसमें भागीदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्कूल प्रमुखों को इसका पालन कराने के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। सरकार चाहती है कि सभी छात्र राष्ट्रगीत से जुड़ें और इसे नियमित रूप से गाएं।
शुभेंदु अधिकारी ने खुद दी जानकारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पुराने सभी आदेशों और प्रथाओं को निरस्त करते हुए अब नया नियम लागू किया गया है। सरकार के मुताबिक यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू होगा और शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले सभी स्कूलों पर लागू रहेगा। इस ऐलान के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
In supersession of all previous orders and practices, the Government of West Bengal has mandated the singing of National Song of Bharat - Vande Mataram, during School Assembly Prayers before commencement of Classes in all Schools under the School Education Department across West… pic.twitter.com/QmQHoFqUfj
स्कूलों को वीडियो रिकॉर्डिंग तक के निर्देश
शिक्षा विभाग ने सिर्फ आदेश जारी कर जिम्मेदारी खत्म नहीं की है। अधिकारियों को इसके कार्यान्वयन का पूरा रिकॉर्ड रखने को कहा गया है। जानकारी के मुताबिक स्कूलों को प्रार्थना सभा की वीडियो रिकॉर्डिंग तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पालन की निगरानी हो सके। इससे साफ है कि सरकार इस आदेश को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं चाहती।
केंद्र की पहल के बाद बढ़ी सक्रियता
यह फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कानून में बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधन में ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने की बात कही गई है। ऐसे में बंगाल सरकार का यह कदम राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
शिक्षकों ने उठाए व्यवहारिक सवाल
राज्य के कई स्कूलों में अब तक मुख्य रूप से ‘जन गण मन’ गाया जाता था। इसके अलावा ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ भी कई जगहों पर शामिल था। अब ‘वंदे मातरम’ जोड़ने के बाद कुछ शिक्षक संगठनों ने समय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि रोज कौन-कौन से गीत गाए जाएंगे और उन्हें समय-सारणी में कैसे शामिल किया जाएगा।