Iran Deal Sparks Protest

ईरान में शांति समझौते पर बढ़ा सियासी तूफान, विदेश मंत्री के खिलाफ खुला मोर्चा

अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर ईरान में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बयान के बाद कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और इस्तीफे की मांग उठने लगी है।

ईरान में शांति समझौते पर बढ़ा सियासी तूफान, विदेश मंत्री के खिलाफ खुला मोर्चा

protest against Iran Foreign Minister in country

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता अभी कागजों पर भी पूरी तरह नहीं पहुंचा है, लेकिन उसके पहले ही ईरान के भीतर राजनीतिक संघर्ष खुलकर सामने आने लगा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एक बयान ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया है कि कट्टरपंथी गुट अब सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार की वार्ता रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं। 

हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समझौते को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। लेकिन ईरान के भीतर इसका विरोध इस बात का संकेत है कि सरकार के लिए विदेशी मोर्चे से ज्यादा मुश्किल घरेलू राजनीतिक मोर्चा साबित हो सकता है। स्थिति अब केवल एक कूटनीतिक बहस तक सीमित नहीं रही। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं और समझौते के समर्थक तथा विरोधी गुट आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

मशहद से शुरू हुआ विरोध

ईरान के मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के स्थानीय कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के रणनीतिक हितों को कमजोर किया जा रहा है। विरोध में शामिल लोगों ने मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई। स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो में प्रदर्शनकारी झंडे और बैनर लेकर सरकार की वार्ता नीति के खिलाफ आवाज उठाते दिखाई दिए।

होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र

कट्टरपंथी गुटों की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान लंबे समय से इसे अपनी सामरिक ताकत के रूप में देखता रहा है। विरोधी गुटों का मानना है कि यदि समझौते की कुछ शर्तें लागू होती हैं तो इस क्षेत्र में ईरान की रणनीतिक पकड़ कमजोर हो सकती है। यही मुद्दा विरोध की सबसे बड़ी वजह बनता नजर आ रहा है।

एक बयान ने बदल दिया राजनीतिक माहौल

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब विदेश मंत्री अराघची ने सरकारी टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में समझौते के कुछ संभावित पहलुओं का जिक्र किया। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य के प्रशासन को लेकर टिप्पणी की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा, लेकिन उनके बयान को विपक्षी धड़ों ने अलग तरीके से पेश किया और सरकार के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया।

तेहरान तक पहुंचा असंतोष

सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में राजधानी तेहरान में भी विरोध प्रदर्शनों का दावा किया गया है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन कथित प्रदर्शनों में विदेश मंत्री के साथ-साथ संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को भी निशाने पर लिया गया। गालिबाफ को वार्ता प्रक्रिया का समर्थक माना जाता है, इसलिए विरोध करने वाले गुट उन्हें भी इस समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

समझौते की तारीख पर बना हुआ है संशय

अमेरिका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। कुछ अंतरराष्ट्रीय सूत्रों ने भी संभावित हस्ताक्षर प्रक्रिया की चर्चा की है। इसके उलट ईरानी नेतृत्व फिलहाल सावधानी बरत रहा है। सरकार की तरफ से किसी तय तारीख की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंतिम सहमति तक पहुंचने में अभी कुछ राजनीतिक और कूटनीतिक बाधाएं बाकी हैं।

सरकार भी जल्दबाजी में नहीं

ईरानी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वार्ताएं महत्वपूर्ण चरण में जरूर पहुंची हैं, लेकिन समझौता अभी तत्काल होने वाला नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि बातचीत जारी है और कई मुद्दों पर अंतिम सहमति बनना बाकी है। यह बयान बताता है कि सरकार एक तरफ अंतरराष्ट्रीय वार्ता को आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि दूसरी तरफ घरेलू राजनीतिक विरोध को भी संतुलित करने की कोशिश कर रही है।

ईरान में उभर रहा यह विरोध केवल एक समझौते का विवाद नहीं है। यह उस बड़े संघर्ष की झलक भी है जिसमें एक पक्ष आर्थिक और कूटनीतिक राहत चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे राष्ट्रीय प्रभाव और रणनीतिक शक्ति के नजरिए से देख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में समझौते की दिशा जितनी महत्वपूर्ण होगी, उससे कहीं ज्यादा नजर ईरान की आंतरिक राजनीति पर रहेगी।

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