मिडिल ईस्ट में जंग की आग और तेज होती दिख रही है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का अब नौवां दिन है। हालात हर घंटे बदलते नजर आ रहे हैं। एक तरफ इजराइल ने ईरान के तेल भंडार और रिफाइनरी से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। वहीं, दूसरी तरफ ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के और वरिष्ठ अधिकारी निशाने पर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज ईरान पर बहुत जोरदार वार होगा।' इसी बीच कुवैत में ड्रोन हमले में मारे गए छह अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए ट्रंप Dover Air Force Base जाने वाले हैं।
ईरान के तेल ठिकाने निशाने पर
इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने ईरान के तेल भंडार और ईंधन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर बड़ा हमला शुरू किया है। हमलों में करीब 30 फ्यूल टैंक और तीन बड़े तेल डिपो को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई का मकसद ईरान की ऊर्जा सप्लाई को कमजोर करना बताया जा रहा है, ताकि उसकी सैन्य क्षमताओं पर दबाव बनाया जा सके। इजराइली वायुसेना ने कुछ रिफाइनरी से जुड़े इलाकों में भी हमले किए हैं।
इस्फहान एयरपोर्ट पर भी हमला
इजराइल ने ईरान के इस्फहान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हवाई हमला किया। इजराइली रक्षा बलों यानी Israel Defense Forces का कहना है कि यहां मौजूद ईरानी शासन के सैन्य ठिकानों और Grumman F-14 Tomcat लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया गया। इसके साथ ही एयर डिफेंस सिस्टम और रडार नेटवर्क को भी नष्ट करने की कोशिश की गई, जो इजराइली विमानों के लिए खतरा बन सकते थे।
ईरान का पलटवार, पांच देशों को बनाया निशाना
इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए पांच देशों को निशाना बनाया। इनमें इजराइल, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई शामिल हैं। ईरान की सेना से जुड़ी आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसके पास अमेरिका और इजराइल के खिलाफ लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता है।
IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने कहा कि ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड छह महीने तक संघर्ष जारी रख सकते हैं। उनका दावा है कि अब तक मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़े 200 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
कुवैत में ड्रोन हमला, एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक निशाने पर
संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों तक साफ दिखने लगा है। कुवैत सशस्त्र बलों ने बताया कि कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंकों पर ड्रोन हमले किए गए। इस हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। अमेरिका में इसे लेकर राजनीतिक और सैन्य हलकों में भी चिंता बढ़ गई है।
लेबनान में होटल पर हमला
इजराइली ड्रोन ने Beirut के मशहूर समुद्री पर्यटन इलाके रौशे जिले में स्थित एक होटल को निशाना बनाया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में चार लोगों की मौत हुई है जबकि करीब दस लोग घायल बताए जा रहे हैं।
खाड़ी देशों में गहरा सकता है पानी का संकट
जंग का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में पानी का संकट भी गहराने की आशंका जताई जा रही है। ओमान, कुवैत और सऊदी अरब जैसे कई देश पीने के पानी के लिए समुद्री पानी को साफ करने वाले डीसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर हैं। अगर इन प्लांट्स को निशाना बनाया गया तो कई शहरों में पानी की आपूर्ति अचानक रुक सकती है।
ईरान के परमाणु भंडार पर अमेरिका की नजर
इस बीच अमेरिका ईरान के परमाणु भंडार को जब्त करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्स को इस्तेमाल किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी के अनुसार अमेरिका-इजराइल के हमलों में अब तक कम से कम 1332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं।