नई दिल्लीः अमेरिका के जॉर्जिया स्थित अटलांटा में 31 अक्टूबर को भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की क्वाड बैठक हुई । इसके बाद जारी संयुक्त बयान में चारों देशों ने वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट डालने वाली आर्थिक गतिविधियों और मनमाने निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता जताई। बयान में चीन का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसका इशारा उसी की ओर माना जा रहा है । इस पर चीन के सरकारी मीडिया ने सवाल उठाए तो भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने उसे जवाब दिया।
चीन ने क्वाड के इरादे पर उठाए सवाल
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया कि संयुक्त बयान में चीन का नाम भले न हो लेकिन निशाना उसी को बनाया गया है । लेख के मुताबिक, अगर क्वाड सप्लाई चेन की सुरक्षा के नाम पर चीनी उद्योगों के सामने तकनीकी और व्यापारिक बाधाएं खड़ी करता है, तो उसके असली इरादे छिप नहीं सकते।
इस पर कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कहा कि चीन क्रिटिकल सप्लाई चेन पर नियंत्रण करना चाहता है, ताकि उसे वैश्विक स्तर पर बड़ा फायदा मिल सके। ऐसे में दूसरे देशों की ओर से चीन की इस पकड़ को कमजोर करने की कोशिश करना पूरी तरह जायज है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई पर क्यों है चिंता?
क्रिटिकल मिनरल्स यानी ऐसे खनिज, जिनकी जरूरत आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में होती है। इनकी सप्लाई पर चीन की मजबूत पकड़ लंबे समय से कई देशों की चिंता का विषय रही है। निर्यात प्रतिबंधों के कारण दूसरे देशों के उद्योगों और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
क्वाड के संयुक्त बयान में भरोसेमंद और खुली सप्लाई चेन बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही एडवांस्ड सेमीकंडक्टर और एआई हार्डवेयर के लिए सुरक्षित सप्लाई चेन तैयार करने की बात कही गई है ।
क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का समूह है। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना है। अटलांटा की बैठक में चारों देशों ने साफ किया कि वे आर्थिक सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दों पर मिलकर काम जारी रखेंगे।