Supreme Court Upholds Pastor Entry Ban in Bastar V

बस्तर में पादरियों-कनवर्टेड लोगों के गांवों में प्रवेश पर प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने बस्तर के ग्राम कुदाल में पादरी और कन्वर्टेड लोगों के प्रवेश पर रोक को वैध माना, ग्रामसभा की कार्रवाई बरकरार

By : नरेंद्र कुमार
बस्तर में पादरियों-कनवर्टेड लोगों के गांवों में प्रवेश पर प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया

बस्तर के कई क्षेत्रों में ग्रामसभाओं ने जारी किया था प्रतिबंधात्मक आदेश

कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुदाल में इसाई पादरियों और कनवर्टेड लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध को लेकर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए बोर्ड के मामले में देश के शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। ग्रामसभा द्वारा गांव की सीमा पर लगाए गए होर्डिंग्स के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।

ग्रामसभा ने गांव के प्रवेश द्वारों पर सूचना पट्ट लगाकर पादरियों और कन्वर्टेड हो चुके लोगों के प्रवेश पर रोक का उल्लेख किया था। ग्रामसभा का कहना था कि यह कदम गांव में कथित रूप से प्रलोभन या दबाव के माध्यम से हो रहे कनवर्जन को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस मामले में पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामसभा की कार्रवाई को सही ठहराया था। हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कोलीन गोंसाल्वेस ने दलील दी कि गांव में प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध असंवैधानिक है और इस पहलू पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। वहीं केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता को नियमों के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों का पहले उपयोग करना चाहिए था.

याचिकाकर्ता को ग्रामसभा में बात रखने की स्वतंत्रता दी थी

सुनवाई के दौरान अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के उस भाग का उल्लेख किया, जिसमें याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी अर्थात ग्रामसभा के समक्ष अपनी बात रखने की स्वतंत्रता दी गई थी। पीठ ने टिप्पणी की कि संबंधित प्राधिकारी साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच कर सकता है। अंतत सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। ग्राम सभा की कार्रवाई बरकरार है।

न्यायालय ने कहा था-गांवों में पेसा कानून लागू

इस मामले को लेकर धर्म प्रचारक हाईकोर्ट भी गए थे। न्यायालय ने भी अपने निर्णय में कहा कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र के गांवों में पेसा कानून लागू है। इसलिए अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए वे ऐसा कर सकते हैं। फिर हाईकोर्ट में ग्राम सभा की जीत के बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट आए, जहां उनकी याचिका खारिज हुई है। वहीं इस निर्णय से ग्राम सभा को जीत मिली है। इसका मतलब यह हुआ कि गांव वाले अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का फैसला प्रभावी रहेगा। संबंधित ग्राम सभाएं यह निर्णय लेने के लिए अधिकृत रहेंगी कि गांव में ऐसे धर्म प्रचारकों का प्रवेश हो या नहीं।


 

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