SC बोला पैकेट पर लिखो फूड हेल्दी या नहीं

SC बोला फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग लगाओ: पैकेट पर लिखा होगा- फूड हेल्दी या अनहेल्दी; जानें ये क्यों जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग लागू करने पर विचार को कहा है, ताकि लोग शुगर, नमक और फैट की मात्रा समझकर हेल्दी विकल्प चुन सकें।

By : संजय चतुर्वेदी
SC बोला फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग लगाओ: पैकेट पर लिखा होगा- फूड हेल्दी या अनहेल्दी; जानें ये क्यों जरूरी

नई दिल्ली। पैकेट में बंद खाने की चीजें आजकल लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। चिप्स, बिस्किट, कुकीज या नमकीन खरीदते समय हममें से ज्यादातर लोग पैकेट पलटकर पीछे लिखी न्यूट्रिशन जानकारी पढ़ने की जहमत भी नहीं उठाते। ऐसे में हमें यह पता ही नहीं चलता कि जिस चीज़ को हम स्वाद लेकर खा रहे हैं, उसमें शुगर, नमक और फैट कितनी मात्रा में मौजूद है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इसी आदत को बदलने की दिशा में अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ लागू करने पर विचार करने को कहा है, ताकि उपभोक्ता एक नजर में समझ सकें कि फूड हेल्दी है या अनहेल्दी।

फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग क्या है?

फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग (FOPL) ऐसा लेबल है, जो किसी भी पैकेज्ड फूड के आगे की तरफ लगाया जाता है। इसमें शुगर, नमक (सोडियम), सैचुरेटेड फैट और कैलोरी जैसी जरूरी जानकारी को आसान भाषा, रंगों या संकेतों के जरिए दिखाया जाता है। यह पीछे छपे लंबे न्यूट्रिशन चार्ट से अलग होता है। इसका मकसद है कि ग्राहक बिना ज्यादा पढ़े-समझे तुरंत अंदाजा लगा सके कि प्रोडक्ट उसकी सेहत के लिए कितना सुरक्षित है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिए निर्देश?

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और केंद्र सरकार से कहा है कि वे पैकेज्ड फूड पर चेतावनी वाले फ्रंट लेबल को लागू करने पर गंभीरता से विचार करें।

देश में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और हाई शुगर-हाई फैट फूड का बढ़ता सेवन है। ऐसे में कोर्ट चाहता है कि लोगों को खरीदारी के समय ही साफ चेतावनी मिल जाए।

पैकेज्ड फूड पर न्यूट्रिशन जानकारी कहां होती है?

आमतौर पर पैकेट के पीछे या साइड में एक टेबल दी होती है, जिसमें प्रति 100 ग्राम या प्रति सर्विंग के हिसाब से कैलोरी, फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, शुगर और सोडियम की मात्रा लिखी होती है।

समस्या यह है कि यह जानकारी छोटे अक्षरों में और तकनीकी भाषा में होती है, जिसे हर कोई आसानी से समझ नहीं पाता।

फ्रंट लेबल से क्या पता चलेगा?

फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग से उपभोक्ता को तुरंत यह जानकारी मिल सकती है:

-प्रोडक्ट में शुगर ज्यादा है या नहीं।

-नमक की मात्रा सुरक्षित सीमा में है या नहीं।

-फैट का स्तर कितना है।

-कुल कैलोरी कितनी है।

-क्या यह रोजाना सेवन के लिए सही है।

रंग आधारित संकेत (जैसे लाल, पीला, हरा) या साफ चेतावनी शब्द लोगों को तुरंत सावधान कर सकते हैं।

इससे क्या फायदे होंगे?

फ्रंट लेबलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जटिल न्यूट्रिशन डेटा आसान भाषा में बदल जाएगा।

मुख्य लाभ: फ्रंट ऑफ लेबलिंग से उपभोक्ताओं को कई लाभ मिलेंगे। इनमें से कुछ ये खास हैंः

-एक नजर में हेल्थ स्टेटस स्पष्ट

-बेहतर और जागरूक खरीदारी

-बच्चों में जंक फूड की खपत पर नियंत्रण

-लाइफस्टाइल बीमारियों का जोखिम कम

-कंपनियों पर हेल्दी प्रोडक्ट बनाने का दबाव

-लाइफस्टाइल बीमारियों से जुड़ा बड़ा मुद्दा

भारत में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि प्रोसेस्ड फूड में छिपी अतिरिक्त शुगर और नमक बड़ी वजह है। अगर पैकेट के सामने ही साफ लिखा हो कि प्रोडक्ट में ‘हाई शुगर’ या ‘हाई फैट’ है, तो लोग सोच-समझकर फैसला लेंगे। यही फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग का असली उद्देश्य है- जागरूकता बढ़ाना और बीमारी के खतरे को कम करना।

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