राजेश जायसवाल, महराजगंज: धनतेरस और दीपावली के त्योहार पर सोने-चांदी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। खासकर धनतेरस के दिन चांदी के सिक्के खरीदने का विशेष चलन है। इसी का फायदा उठाकर बाजार में चांदी के सिक्कों के नाम पर ग्राहकों के साथ ठगी किए जाने की आशंका जताई जा रही है। त्योहार के दौरान लाखों रुपये के चांदी के सिक्कों की बिक्री होती है, लेकिन इन सिक्कों की शुद्धता परखना आम ग्राहकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, पुराने चांदी के सिक्कों की तरह दिखने वाले नए सिक्के तैयार कर बाजार में उतारे जाने की आशंका है। बताया जा रहा है कि कुछ कारोबारी पुराने सिक्कों जैसा रंग-रूप देने के लिए नए सिक्कों को कई सप्ताह पहले मिट्टी में दबाकर रखते हैं, ताकि वे देखने में पुराने सिक्कों जैसे नजर आएं। आरोप है कि ऐसे सिक्कों में चांदी की मात्रा कम रखकर करीब 40 से 50 प्रतिशत शुद्धता वाले सिक्के भी बाजार में बेचे जा सकते हैं।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि आम ग्राहक सिक्के की चमक, वजन और पुराने डिजाइन को देखकर उसे असली चांदी का सिक्का समझ लेते हैं। खरीदारी के समय न तो शुद्धता की जांच कराते हैं और न ही सिक्के की गुणवत्ता से संबंधित प्रमाणपत्र मांगते हैं। पूजा-पाठ के लिए खरीदे गए सिक्के अक्सर घर के मंदिर या तिजोरी में रख दिए जाते हैं और उनकी दोबारा जांच भी नहीं कराई जाती। ऐसे में ग्राहकों को ठगी का पता काफी देर से चलता है।
त्योहारी सीजन में चांदी के सिक्कों की मांग बढ़ने के साथ ही ग्राहकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों को हॉलमार्क या लागू शुद्धता संबंधी प्रमाण, पक्का बिल और सिक्के में चांदी की वास्तविक मात्रा की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। केवल पुराने डिजाइन या चमक देखकर सिक्के की शुद्धता पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
अब सवाल यह है कि धनतेरस पर चांदी की खरीदारी के नाम पर यदि कम शुद्धता वाले सिक्के बेचे जा रहे हैं तो संबंधित विभाग ऐसे कारोबारियों की जांच कब करेगा? त्योहार की खुशियों के बीच ग्राहकों की जेब पर डाका न पड़े, इसके लिए बाजार में बिक रहे चांदी के सिक्कों की शुद्धता की जांच और निगरानी जरूरी है।