राजेश जायसवाल, महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा से सटे नौतनवा क्षेत्र में नौतनवां से दिल्ली तक संचालित कुछ निजी बसों की गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। आरोप है कि सवारियों को लाने-ले जाने की आड़ में इन बसों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सामान की ढुलाई के लिए किया जा रहा है। दिल्ली से नौतनवा लौटते समय बसों में सवारियां कम और सामान अधिक भरा रहता है। इसके बाद सामान को नौतनवा बाईपास पर उतारकर अलग-अलग गोदामों में जमा किया जाता है और कथित तौर पर कैरियरों के माध्यम से नेपाल भेज दिया जाता है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि नौतनवा से दिल्ली तक संचालित कुछ बसें टूरिस्ट परमिट पर चल रही हैं। इन बसों में नेपाल से आने वाले यात्रियों को भी बैठाकर दिल्ली तक पहुंचाया जाता है, जबकि वापसी के दौरान बसों का इस्तेमाल सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है। बताया जा रहा है कि दिल्ली से लाया गया सामान पहले नौतनवा बाईपास स्थित एक गोदाम में उतारा जाता है। इसके बाद उसे अलग-अलग गोदामों में एकत्रित कर छोटे-छोटे खेपों में कैरियरों के जरिए नेपाल भेजने का कथित नेटवर्क संचालित है।
इस पूरे खेल में कुछ बिचौलियों की भूमिका भी चर्चा में है। आरोप है कि ये बिचौलिए बाहर से बसें मंगवाकर नौतनवा से दिल्ली तक उनका संचालन करवा रहे हैं। इतना ही नहीं, क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ बिचौलियों ने जिम्मेदार अधिकारियों की जांच और कार्रवाई से बसों को बचाए रखने का जिम्मा ले रखा है। जो चर्चा कभी से बना हुआ है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बसों का इस्तेमाल सवारी परिवहन के बजाय व्यावसायिक सामान की ढुलाई के लिए किया जा रहा है तो परिवहन विभाग, पुलिस, जीएसटी और कस्टम विभाग की नजर इन गतिविधियों पर क्यों नहीं पड़ रही है? दिल्ली से आने वाली बसों में भारी मात्रा में सामान लादकर नौतनवा तक पहुंचाया जा रहा है तो रास्ते में वाहनों की जांच किस स्तर पर हो रही है? वहीं, बाईपास पर सामान उतारने और गोदामों में जमा करने के बाद नेपाल भेजे जाने वाले नेटवर्क की निगरानी कौन कर रहा है?
भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा और जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय रहती हैं। उसके बाद भी तस्कर अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। थाना प्रभारी नौतनवा अभिषेक सिंह का कहना है कि इस तरह के बस के चलने की जानकारी नहीं है अगर ऐसा मामला सामने आता है तो जांच कर कार्यवाही की जाएगी।