लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और कुख्यात अपराधी भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू के बीच हुई मुठभेड़ का अंत उसके एनकाउंटर के साथ हुआ। 2 लाख रुपए का इनामी भानु पुलिस की लंबे समय से तलाश सूची में शामिल था और उस पर हत्या, लूट, रंगदारी समेत 41 आपराधिक मामले दर्ज थे। रविवार देर रात हुई इस कार्रवाई में भानु प्रताप गंभीर रूप से घायल हुआ था। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घेराबंदी होते ही शुरू कर दी फायरिंग
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि भानु प्रताप अपने एक साथी के साथ बाइक पर सवार होकर इलाके से निकलने वाला है। सूचना के आधार पर टीम ने महाराजगंज थाना क्षेत्र के एमी घाट के पास घेराबंदी की। पुलिस के अनुसार, रोकने की कोशिश होते ही आरोपी ने स्टेन गन से फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी, जबकि उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकला।
एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो STF ने खुद पहुंचाया अस्पताल
मुठभेड़ के बाद घायल भानु को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस बुलाई गई, लेकिन समय पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद STF टीम उसे खुद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गई। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
चार जिलों से घोषित था इनाम
भानु प्रताप पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। आजमगढ़ पुलिस ने उस पर 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। इसके अलावा अंबेडकरनगर से 50 हजार, गोरखपुर से 25 हजार और बस्ती से 15 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले इन्हीं जिलों में थे।
दूध कारोबारी हत्याकांड से आया था चर्चा में
भानु प्रताप का नाम 2025 में आजमगढ़ के चर्चित दूध कारोबारी पातीराम यादव हत्याकांड में सामने आया था। कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी थी। इस मामले के बाद उस पर इनाम की राशि भी बढ़ाई गई थी और वह लगातार फरार चल रहा था।
10 साल से गांव से था दूर
गोरखपुर जिले के बेलघाट क्षेत्र का रहने वाला भानु प्रताप अपने परिवार से भी लंबे समय से दूर था। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह करीब 10 साल से गांव नहीं आया था। उसके पिता खेती-किसानी करते हैं, जबकि दोनों भाई बाहर नौकरी करते हैं। गांव में उसके एनकाउंटर की खबर पहुंचने के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
2010 से सक्रिय था अपराध की दुनिया में
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश के अनुसार, भानु प्रताप वर्ष 2010 से संगठित अपराध से जुड़ा हुआ था। पुलिस उसे पूर्वांचल के सक्रिय अपराधियों में गिनती थी और कई गंभीर मामलों में उसकी तलाश कर रही थी। अधिकारियों का कहना है कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई से क्षेत्र में अपराध नियंत्रण अभियान को बड़ी सफलता मिली है।