Bhopal Bank Corruption Case Verdict

भोपाल में सहकारी बैंक भ्रष्टाचार मामला: पद का दुरुपयोग कर जमीन नीलाम की, चार आरोपियों को सजा

भोपाल में सहकारी बैंक से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अदालत का बड़ा फैसला। अधिकारियों समेत चार आरोपियों को पद के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के मामले में तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई।

By : Admin
भोपाल में सहकारी बैंक भ्रष्टाचार मामला: पद का दुरुपयोग कर जमीन नीलाम की, चार आरोपियों को सजा

Bhopal News

भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लंबे समय से चल रहे सहकारी बैंक से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक से जुड़े अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग कर किसान की जमीन को बेहद कम कीमत पर नीलाम करने का आरोप था। मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायालय का फैसला

विशेष लोक अभियोजक हेमलता कुशवाह ने बताया कि 25 फरवरी 2026 को विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने मामले में निर्णय सुनाया। अदालत ने विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, पुष्टिकर्ता अधिकारी आर. एस. गर्ग, तत्कालीन महाप्रबंधक हुकुमचंद सिंघाई और क्रेता भावना पति प्रभात कुमार सिन्हा को दोषी पाया।

इन सभी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी के तहत तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में भी सजा

इसके अलावा बैंक के अधिकारियों हरिहर प्रसाद मिश्रा, आर. एस. गर्ग और हुकुमचंद सिंघाई को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत भी दोषी माना गया। इन धाराओं में भी अदालत ने प्रत्येक आरोपी को तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया।

किसान की जमीन कम कीमत पर नीलाम

मामला भोपाल जिले की हुजूर तहसील के ग्राम महाबड़िया का है। यहां के आदिवासी किसान मोहम्मद फिरोज ने वर्ष 1990 में अपनी कृषि भूमि गिरवी रखकर पंप और थ्रेसर खरीदने के लिए 20 हजार रुपये का ऋण लिया था। बाद में बैंक अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए किसान की करीब 5 एकड़ जमीन को वर्ष 2000 में मात्र 70 हजार रुपये में नीलाम कर दिया। बताया गया कि यह नीलामी बाजार मूल्य और कलेक्टर द्वारा तय मूल्य से काफी कम कीमत पर की गई थी।

दस्तावेजों में गड़बड़ी का आरोप

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नीलामी प्रक्रिया में कई नियमों का उल्लंघन किया। नीलामी से संबंधित नोटशीट और दस्तावेज तैयार कर उन्हें संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्था भोपाल के पास भेजा गया, जहां से इस नीलामी को मंजूरी दे दी गई। बाद में इस मामले की शिकायत मिलने पर लोकायुक्त पुलिस ने जांच शुरू की और जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।

अदालत ने साक्ष्यों को माना पर्याप्त

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ तर्क पेश किए। अदालत ने अभियोजन के तर्कों और साक्ष्यों को सही मानते हुए चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी हेमलता कुशवाहा ने की।

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