भोपाल जिले में बढ़ते भू-जल संकट की आशंका के बीच प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए निजी ट्यूबवेल और बोरवेल खनन पर तत्काल रोक लगा दी है।पाबंदी के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
जिले की सीमा से बोरिंग मशीनों के गुजरने पर भी रोक
प्रशासन ने सख्ती बढ़ाते हुए बोरवेल मशीनों के जिले की सीमा से गुजरने पर भी रोक लगा दी है। इसका उद्देश्य अवैध बोरिंग गतिविधियों को रोकना है। आदेश का उल्लंघन करने पर दो हजार रुपए तक जुर्माना, दो साल की सजा या दोनों का प्रावधान रखा गया है।
अनुमति के बिना नलकूप खुदाई पर रोक
जारी आदेश के अनुसार अब जिले में बिना प्रशासनिक अनुमति के कोई भी व्यक्ति ट्यूबवेल या नलकूप की खुदाई नहीं करा सकेगा। यदि कहीं अवैध रूप से बोरिंग कराई जाती है तो संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचकर मशीन जब्त करेंगे और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
सूखा राहत नियंत्रण सेल गठित
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने सूखा राहत नियंत्रण सेल गठित किया है। यह ग्रीष्मकाल में ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित पेयजल संकट के त्वरित समाधान की पहल करेगा। यह नियंत्रण सेल 30 जून 2026 तक संचालित होगा।नियंत्रण कक्ष प्रतिदिन दो पालियों में कार्य करेगा। पहली पाली सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:00 बजे से रात 8:00 बजे तक संचालित होगी। इसका उद्देश्य पेयजल संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करना है।
ये हैं सेमी-क्रिटिकल क्षेत्र
सामान्य तौर पर पूरे भोपाल में भू-जल स्तर चिंताजनक स्थिति में है। खासकर तीन क्षेत्र ऐसे हैं जिन्हें 2024 में ही सेमी-क्रिटिकल घोषित किया जा चुका है। जानकारों के मुताबिक यहां भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है.2024 में आई केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भोपाल जिला सेमी-क्रिटिकल क्षेत्र में शामिल है। भोपाल शहर के साथ फंदा और बैरसिया ब्लॉक भी इससे अछूते नहीं हैं, जहां केवल 23 प्रतिशत भू-जल स्तर ही शेष बचा है।
तीन क्षेत्र चिंताजनक
स्थान- भू-जल की स्थिति
भोपाल शहर- 71.13 प्रतिशत
फंदा - 83.47 प्रतिशत
बैरसिया- 72.48 प्रतिशत
भोपाल शहर में 71.13, फंदा में 83.47 और बैरसिया में 72.48 प्रतिशत तक भू-जल की निकासी हो रही है। इसके चलते पानी का स्तर 80 से 150 फीट तक नीचे चला गया है। कई स्थानों पर हैंडपंप बंद होने लगे हैं।