विवादों से घिरे बीएलएफ के लिए भारत भवन के दरवाजे बंद करें

विवादों से घिरे बीएलएफ के लिए भारत भवन के दरवाजे बंद करें

बीएलएफ विवाद पर भारत भवन के न्यासी का पत्र, संस्कृति विभाग में खलबली, भारत भवन के दरवाजे बंद करने की मांग।

By : Swadesh Bhopal
विवादों से घिरे बीएलएफ के लिए भारत भवन के दरवाजे बंद करें

भोपाल। देश के प्रतिष्ठित बहुकला केंद्र भारत भवन के न्यासी विजय मनोहर तिवारी ने भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल के ताजा विवाद को एक अलग दिशा में मोड़ दिया है।

किताब नहीं, भारत भवन बनाम बीएलएफ का पुराना विवाद

लेखक आभाष मल्दहियार अपनी किताब को लेकर पूरे देश में यह नेरेटिव खड़ा कर रहे हैं कि बाबर पर लिखी उनकी किताब का विरोध हुआ और धमकियाँ दी गईं। जबकि तिवारी ने इसे भारत भवन और बीएलएफ के बीच का पुराना विवाद बताया है, जिसका किसी किताब या लेखक से कोई संबंध नहीं है। संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी को लिखे लंबे पत्र ने भारत भवन को लेकर संस्कृति विभाग के निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

8 साल से सिर्फ बीएलएफ को भारत भवन क्यों?

उन्होंने स्पष्ट किया है कि आठ साल से भारत भवन बीएलएफ को दिया जा रहा है जबकि दूसरी किसी संस्था को यह उपलब्ध नहीं है। न्यास की बैठकों में वरिष्ठ रंगकर्मी और न्यासी राजीव वर्मा ने यह मुद्दा कई बार उठाया। राजीव वर्मा भोपाल थिएटर्स के अध्यक्ष भी हैं। बीएलएफ के पिछले आयोजन भी विवादों में रहे हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य के नाम पर ऐसी विवादास्पद संस्था को जगह देने से भारत भवन की साख खराब हुई है और साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाएं इसे लेकर लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं कि या तो भारत भवन सभी के लिए खुले या किसी के लिए नहीं। कम से कम ऐसी विवादों से घिरी संस्था को तो बिल्कुल नहीं।


अगले साल से भारत भवन बीएलएफ को न दिया जाए

तिवारी ने लिखा है-"शासन को निर्णय करना चाहिए कि अगले वर्ष से बीएलएफ के लिए भारत भवन उपलब्ध नहीं है। लाखों की मदद उन्हें शासन देता ही है। वे चाहें किसी भी बड़े होटल या रिसॉर्ट या धर्मशाला में यह आयोजन कर सकते हैं। समाज में नेरेटिव बनाने के लिए जैसे भी विषय उन्हें चुनने हों, वे स्वतंत्र हैं, अभिव्यक्ति की अपार स्वतंत्रता है और वे शक्ति संपन्न हैं। किंतु भारत भवन जैसे प्रतिष्ठित कला केंद्र को बीएलएफ जैसे बदनामी बटोरने वाले आयोजनों से बचाया जाना तत्काल आवश्यक है।'

मध्यप्रदेश में विषयों की कमी नहीं, फिर बाबर ही क्यों?

उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी किताब या लेखक से कोई लेना-देना नहीं है। मध्यप्रदेश भारत का ह्दय प्रदेश है। यहाँ भारत केंद्रित और स्थानीय प्रासंगिक विषयों की क्या कमी है? मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक विरासत, राजा भोज, विक्रमादित्य, रानी कमलापति, भीमबैठका और हाल ही में देश भर की चर्चा में आए विदिशा के ऐतिहासिक उदयपुर जैसे विषय अनेक हैं, जिन पर विमर्श किया जा सकता था। इनकी जगह पर बाबर जैसे आक्रांता की चर्चा भोपाल में समझ के परे है, जबकि अयोध्या आस्था और विकास के मार्ग पर उजाले से भर रही है।

तिवारी के शब्द हैं "बाबर जैसे आक्रमणकारी को विमर्श–केंद्र में लाना न केवल अनुपयुक्त है, बल्कि भारत की आत्मा के वर्तमान प्रवाह के बिल्कुल विपरीत भी। कम से कम शासन के प्रांगण में शासन की सहायता से होने वाले लिट फेस्ट नाम से होने वाले वैचारिक अनुष्ठान को इनसे बचा जाना ही उचित था मगर अत्यंत दुख की बात है कि एक कर्कश विवाद अनावश्यक भारत भवन से जुड़ गया।'

संबंधित सामग्री

बी एल एफ: लोग इसे अपनाएं यह संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाता है

बी एल एफ: लोग इसे अपनाएं यह संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाता है

भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल पर उठे आरोपों के बीच जानिए क्यों संवाद, बहस और विचार-विमर्श भारतीय संस्कृति की असली ताकत हैं।

Jan 18, 2026
भारत भवन पर उठे सवाल, न्यासी की चिट्ठी से संस्कृति विभाग में हलचल

भारत भवन पर उठे सवाल, न्यासी की चिट्ठी से संस्कृति विभाग में हलचल

भारत भवन पर सवाल, न्यासी विजय मनोहर तिवारी की चिट्ठी से BLF और संस्कृति विभाग में मचा हड़कंप।

Jan 13, 2026