भारत भवन में बीएलएफ का आयोजन: बाबर भारत खोजने आया...

भारत भवन में बीएलएफ का आयोजन: बाबर भारत खोजने आया...

By : Swadesh Bhopal
भारत भवन में बीएलएफ का आयोजन: बाबर भारत खोजने आया...

भोपाल के बहु-कलात्मक केंद्र 'भारत भवन' में शुक्रवार से शुरू हो रहे तीन दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल विवादों के घेरे में आ गया है. संस्कृति विभाग के अधीन इस केंद्र में इस विषय पर चर्चा के लिए विद्वानों का जमावड़ा हो रहा है कि बाबर भारत की खोज करने आया था। वही बाबर, जिसने भारत के संस्कृति पुरुष श्रीराम की जन्मभूमि को ध्वस्त किया, उसकी महत्ता पर मध्य प्रदेश सरकार के एक भवन में चर्चा का आयोजन, संस्कृति विभाग की मौजूदगी को ही प्रश्नचिह्नित कर रहा है।

इस आयोजन का दुस्साहसिक पक्ष यह है कि मध्य प्रदेश सरकार इसमें आधिकारिक रूप से सहयोगी है। यह आयोजन भारत भवन के लिखित संविधान के विरुद्ध जाकर किया जा रहा है, क्योंकि भवन के प्रावधानों के अनुसार किसी भी गैर सरकारी संस्था या व्यक्ति को भवन किसी भी आयोजन के लिए नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) के लिए इस नियम को ताक पर रख दिया गया है। इस आयोजन की विषयवस्तु को लेकर भोपाल में पहले भी विवाद हो चुके हैं।

मुगलों को महिमा मंडित करता आयोजन

जब केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के माध्यम से आततायी मुगलों के विस्तार को सीमित कर भारतीय ज्ञान परंपरा को स्थापित करने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारत भवन में बाबर को लेकर नया विमर्श खड़ा करने का प्रयास आयोजक कर रहे हैं। बाबर के आगमन को भारत की नई खोज के साथ जोड़कर नया नैरेटिव स्थापित किया जा रहा है।

एलजीबीटीक्यू का पक्षधर बीएलएफ

कुछ साल पहले इसी भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल के मंच पर ‘आई एम गे आई एम ओरिन’ नामक पुस्तक पर चर्चा आयोजित हुई थी, जिसे लेकर तत्कालीन मंत्री ज्या कुर ने कड़ी आपत्ति जताई थी। मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंचा था.

9 जनवरी से 11 जनवरी तक भारत भवन में आयोजित यह आयोजन भारत भवन न्यास के माध्यम से संचालित होता है, जो निर्धारित करता है कि यहाँ कौन से कार्यक्रम आयोजित होंगे। न्यास की बैठकों में चर्चा होती रही है कि निजी आयोजनों को निर्धारित शुल्क लेकर भारत भवन दिया जाना चाहिए, लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसके बावजूद बीएलएफ के लिए लगातार भारत भवन के ताले खोलकर लाल कारपेट बिछा दिया जाता है। इस वर्ष भी आयोजन के लिए किसी अशासकीय न्यासी सदस्य को भरोसे में नहीं लिया गया।

क्या आतंकवाद के पक्ष में होगा आयोजन?

भारत भवन में नियम विरुद्ध इस आयोजन में बाबर समेत अन्य ऐसे विषयों पर चर्चा है, जो लेफ्ट-इको सिस्टम की हिमायत करते हैं। एक पूर्व न्यासी ने सवाल उठाया कि आयोजन की विषयवस्तु की समीक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए संभव है कि सरकार के इस मंच पर भगवा आतंकवाद और आतंकियों के पक्ष में भी कल कोई आयोजन हो जाए।

आयोजन में शामिल सहयोगी

इस आयोजन में मध्य प्रदेश सरकार का आधिकारिक मोनो उपयोग में लाया जा रहा है। इसके अलावा मध्य प्रदेश टूरिज्म, साहित्य अकादमी, जनजातीय कार्य मंत्रालय, इंडियन ऑयल, एनटीपीसी, एसबीआई समेत बड़े बिल्डर्स और अन्य निजी संस्थान भी सहयोगी हैं।

एसीएस के नाम से आमंत्रण

इस आयोजन के कर्ताधर्ता पूर्व आईएएस राघव चंद्रा हैं, लेकिन खास बात यह है कि आयोजकों ने जो आमंत्रण पत्र वितरित किया है, उसमें राघव चंद्रा के साथ एसीएस संस्कृति और गृह शिव शेखर शुक्ल का नाम भी अंकित है। महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यास के नियमों के अनुसार इस आयोजन की अनुमति अवैध है।

न्यासियों को कुछ नहीं पता

भारत भवन के न्यासी राजीव वर्मा का कहना है कि भारत भवन को प्राइवेट पार्टी को दिए जाने पर उन्हें कोई सहमति नहीं है और इसकी कोई जानकारी नहीं है। बीएलएफ को किस शर्त पर अनुमति दी गई, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। विवादित लेखकों की पुस्तकों पर चर्चा की बात भी उन्हें पता नहीं है। मामले में संस्कृति मंत्री से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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