छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन और प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। धमतरी में करीब 40 चर्चों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर रोक की जानकारी सामने आई है, जबकि कांकेर के बड़े तेवड़ा गांव में प्रार्थना सभा और कथित कनवर्जन की आशंका के बाद पुलिस तैनात है। दूसरी ओर, बस्तर में करीब 10 साल तक ईसाई धर्म मानने वाले एक परिवार के भतरा समाज में लौटने का मामला सामने आया है।तीनों घटनाओं के बीच प्रदेश में प्रार्थना सभाओं, धार्मिक गतिविधियों और कनवर्जन को लेकर चल रही बहस फिर तेज हो गई है।
धमतरी में 40 चर्चों में गैर-ईसाइयों की एंट्री पर रोक
धमतरी में क्रिश्चियन फोरम की ओर से जिले के करीब 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें मेनोनाइट चर्च भी शामिल है। चर्चों के बाहर इस संबंध में सूचना बोर्ड लगाए गए हैं।फोरम का कहना है कि प्रार्थना और चंगाई सभाओं में बाहरी लोगों के पहुंचने के बाद कई बार विवाद की स्थिति बनती है। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है।धमतरी में प्रार्थना सभाओं को लेकर पिछले कुछ समय से हिंदू संगठनों की ओर से विरोध किया जाता रहा है। इन संगठनों की ओर से कनवर्जन के आरोप भी लगाए गए हैं। दूसरी तरफ ईसाई संगठनों ने इन आरोपों से इनकार किया है।मामले को देखते हुए प्रशासन ने शांति समिति की बैठक भी बुलाई थी। दोनों पक्षों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई।
1500 आवेदनों के दावे पर प्रशासन की अलग जानकारी
प्रार्थना सभाओं में शामिल होने और धर्म परिवर्तन को लेकर करीब 1500 आवेदन आने का दावा भी किया गया है। हालांकि, कलेक्ट्रेट के संबंधित अधिकारी का कहना है कि प्रार्थना सभा से जुड़े आवेदनों का अलग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।जिला पंचायत CEO ने भी मामले की जानकारी लेने और आवेदनों की जांच कराने की बात कही है। वहीं क्रिश्चियन फोरम के पदाधिकारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति पर प्रार्थना सभा में शामिल होने या धर्म परिवर्तन के लिए दबाव नहीं बनाया जा रहा।
कांकेर के बड़े तेवड़ा में तीन दिन से पुलिस तैनात
कांकेर जिले के आमाबेड़ा थाना क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में एक ग्रामीण के घर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद विवाद की स्थिति बनी। प्रार्थना सभा और कथित कनवर्जन की आशंका को लेकर गांव में तनाव की सूचना है।घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस बल गांव में तैनात है। अंतागढ़ SDM और एडिशनल SP ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और स्थिति शांत कराई। हालात को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी भेजा गया है।हालांकि, जिस घर को लेकर विवाद हुआ, उसके मालिक ने प्रार्थना सभा या कनवर्जन की बात से इनकार किया है।
पहले भी चर्च में तोड़फोड़ का मामला आया था
बड़े तेवड़ा में धर्मांतरण को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। पिछले विवाद के दौरान गांव के एक चर्च में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। इसके बाद से पुलिस और प्रशासन इस इलाके में धार्मिक विवाद से जुड़े मामलों को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।
बस्तर में 10 साल बाद परिवार की मूल समाज में वापसी
बस्तर के बड़े बोदेल पंचायत के छोटे बोदेल गांव में एक परिवार के करीब 10 साल बाद ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल भतरा समाज में लौटने का मामला सामने आया है।परिवार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुद्धिकरण और पानी का छिड़काव किया गया। श्रीधर बघेल के परिवार ने अपनी इच्छा से भतरा समाज में लौटने की बात कही है।परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि फैसला बिना किसी दबाव या प्रलोभन के लिया गया। कार्यक्रम में गांव के माटी पुजारी फगराम गोयल, कोटवार हरिसिंह नाना, पटेल ईश्वर गोयल, नाईक रामकुरसो गोयल और पाईक सहदेव बघेल समेत ग्रामीण मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान परिवार का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और सामाजिक रूप से दोबारा स्वीकार किए जाने की बात कही गई।
फिलहाल धमतरी और कांकेर में प्रशासन की नजर कानून-व्यवस्था पर है, जबकि बस्तर में परिवार की समाज में वापसी को लेकर स्थानीय स्तर पर गतिविधियां हुई हैं। इन घटनाओं के बीच प्रार्थना सभाओं और कनवर्जन से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति को लेकर प्रशासनिक जांच और स्थानीय पक्षों के दावों पर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।