Chhattisgarh Liquor Scam 27000 Page Challan

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में 27000 पन्नों का चालान पेश; 20 लोग और 22 कंपनियाँ आरोपी

छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में एसीबी ईओडब्ल्यू ने रायपुर की विशेष अदालत में 27 हजार पन्नों का 10वां चालान पेश किया। 20 लोगों और 22 फर्मों पर आरोप हैं। अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी।

By : संजय चतुर्वेदी
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में 27000 पन्नों का चालान पेश; 20 लोग और 22 कंपनियाँ आरोपी

Chhattisgarh Liquor Scam chargesheet present

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में जांच एजेंसियों ने अदालत में एक और बड़ा दस्तावेज दाखिल किया है। भष्टाचार निवारण ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी एसीबी ईओडब्ल्यू ने रायपुर की विशेष अदालत में 27 हजार पन्नों का 10वां चालान पेश किया है। एजेंसी इस पूरे घोटाले को करीब 3200 करोड़ रुपये का बता रही है। नए चालान में रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर समेत 20 लोग और 22 फर्म या कंपनियाँ आरोपी बनाई गई हैं। इसी के साथ एजेंसी ने सीएसएमसीएल के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ छठा पूरक चालान भी दाखिल किया है। यह मामला 182.98 करोड़ रुपये के फर्जी मैनपावर भुगतान से जुड़ा है।

बिना टैक्स की शराब और हवाला के जरिए दुबई तक पैसा

जांच एजेंसी का कहना है कि शराब सिंडिकेट ने आबकारी व्यवस्था को लेकर अपने हिसाब से चलाया और अवैध कमीशन वसूला। आरोप है कि डिस्टलरी संचालकों ने आबकारी शुल्क चुकाए बिना पार्ट बी नाम से अतिरिक्त शराब बनवाई। इस शराब पर डुप्लीकेट होलोग्राम लगाए गए और फर्जी परिवहन परमिट के सहारे इसे सरकारी दुकानों तक पहुंचाया गया।

इतना ही नहीं बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में ही दर्ज नहीं होती थी। कैश रकम सीधे सिंडिकेट तक जाती थी। एजेंसी के अनुसार, यह कैश हवाला और आंगड़िया नेटवर्क से देश के कई शहरों औ दुबई तक भेजा गया। कुछ रकम बैंक खाते में लोन दिखाकर जमीन और दूसरी संपत्तियों में लगाई गई। कोविड लॉकडाउन के दौरान सिलतरा की एन वी डिस्टिलरी से होटल और बार के रास्ते भी अवैध बिक्री का आरोप है।

मैनपावर कंपनियों को 182 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान

चालान के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच 5 मैनपावर कंपनियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और सेवा शुल्क के नाम पर 182. 98 करोड़ रुपये ज्यादा दिए गए। अकेले अरुणपति त्रिपाठ के कार्यकाल में 152. 40 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। इसमें ओवरटाइम के 82.66 करोड़, बोनस के 12.21 करोड़, अतिरिक्त दिनों के काम के 45.02 करोड़ और सेवा शुल्क के 12.51 करोड़ रुपये शामिल हैं।

क्या था पेमेंट नियम

पेमेंट का नियम साफ था कि कंपनियां पहले अपने कर्मचारियों को वेतन देंगी और उसके बाद सरकार से रकम लेंगी। एजेंसी का आरोप है कि कर्मचारियों को  पैसा दिए बिना ही फर्जी बिल लगा दिए गए और सरकारी खजाने को चूना लगा। जांच में दावा किया गया कि अनवर ढेबर के कहने पर टेंडर की  शर्तें बदलकर यह व्यवस्था तैयार की गई।

कमीशन का हिसाब और संपत्ति में निवेश

एजेंसी के अनुसार मैनपावर कंपनियों से नगद कमीशन जुटाने में सिद्धार्थ सिंघानिया की मुख्य भूमिका रही। हर महीने 70 से 80 लाख रुपये कमीशन लिया जाता था। त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल के करीब 28 से 32 करोड़ रुपये का कमीशन लेकर अनवर ढेबर तक पहुंचाया। अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच सुमीत फैसिलिटीज की तरफ से 15.64 करोड़ रुपये दिए गए। ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को 48.08 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिला। तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को 28.80 लाख रुपये कमीशन दिए जाने के दौरान यह रकम जब्त की गई थी। आंगड़िया नेटवर्क से भेजा गया अवैध पैसा बेंगलुरु की पेंथियान बिल्डर्स के जरिए संपत्ति में लगाया गया।

राजीव भवन का कनेक्शन

प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि सिंडिकेट से जुटाए गए करीब 860 से 880 करोड़ रुपये रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचे। ईडी के मुताबिक यह रकम कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की निगरानी में भेजी गई थी। इस मामले में उनकी 9.06 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। अरुणपति त्रिपाठी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। बीआर लोहिया विदेश में फरार हैं और उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी हो चुका है। आगे की कार्रवाई के लिए इंटरपोल की मदद ली जा रही है। बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी के अनुसार चालान में कुल 42 आरोपी हैं। मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी।

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