भोजशाला रिपोर्ट से मंदिर दावे को बल

धार के भोजशाला पर ASI रिपोर्ट से नया मोड़, मंदिर होने के प्रमाण से हिंदू पक्ष को मिला आधार

धार जिले स्थिति विवादित भोजशाला पर एएसआई की 98 दिन की सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश हुई। मूर्तियों व अवशेषों को मंदिर साक्ष्य बताया, 16 मार्च तक आपत्तियां मांगी गईं।

By : संजय चतुर्वेदी
धार के भोजशाला पर ASI रिपोर्ट से नया मोड़, मंदिर होने के प्रमाण से हिंदू पक्ष को मिला आधार

धारः मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे लंबे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट अदालत में पेश होने के बाद हिंदू पक्ष का दावा पहले से अधिक मजबूत होता दिख रहा है। 98 दिन तक चले वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर तैयार की गई हजारों पृष्ठों की रिपोर्ट में कई ऐसे साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें मंदिर संरचना से जुड़ा बताया गया है।

98 दिन के सर्वे में जुटाए गए अहम साक्ष्य

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यह सर्वे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर 22 मार्च से 27 जून 2024 तक किया था। जुलाई 2024 में सौंपी गई 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट में कई मूर्तियों और स्थापत्य अवशेषों को प्रमुख आधार बनाया गया है।

रिपोर्ट में मांडू के छप्पन महल संग्रहालय में रखी नायिका प्रतिमा, धार जिला संग्रहालय में सुरक्षित अर्धनारीश्वर प्रतिमा और धार किले में संरक्षित 11वीं शताब्दी की भगवान कुबेर की मूर्ति का उल्लेख है। एएसआई के अनुसार ये अवशेष पूर्व में भोजशाला परिसर की खुदाई के दौरान प्राप्त हुए थे और मंदिर स्वरूप के संकेत देते हैं।

परिसर से पहले मिले अवशेषों का भी जिक्र

रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया है कि सर्वे के दौरान प्राप्त शिलालेख, स्थापत्य खंड और अन्य संरचनात्मक चिन्हों के अलावा परिसर में पहले से सुरक्षित सामग्री भी महत्वपूर्ण है। इन साक्ष्यों को कानूनी विवाद में निर्णायक माना जा सकता है। साथ ही यह दावा भी सामने आया है कि स्वतंत्रता से पहले भोजशाला परिसर से कुछ महत्वपूर्ण अवशेष ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बाहर ले जाए गए थे। यह बिंदु भी बहस का हिस्सा बन सकता है।

अदालत ने मांगी 16 मार्च तक लिखित आपत्तियां

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में हालिया सुनवाई के दौरान पक्षकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सर्वे रिपोर्ट का परीक्षण कर 16 मार्च तक अपनी लिखित आपत्तियां और दावे प्रस्तुत करें। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी को हाई कोर्ट को भोजशाला के वास्तविक धार्मिक स्वरूप पर सुनवाई कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां एएसआई की रिपोर्ट पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।

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