भोपाल। मध्यप्रदेश में विमुक्त, घुमंतु और अर्ध-घुमंतु समुदायों को सरकारी योजनाओं तथा बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के लिए चलाए गए प्रदेशव्यापी अभियान के तहत 200 से अधिक समस्या निवारण शिविर आयोजित किए गए। एक महीने तक चले इस अभियान में समुदाय के लोगों से 10 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। अभियान का समापन 30 अक्टूबर को भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित समारोह के साथ हुआ।
मध्यप्रदेश विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु विकास विभाग के तत्वावधान में यह अभियान 1 से 30 अक्टूबर तक चलाया गया। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में तहसील और ग्राम स्तर पर शिविर लगाए गए। इनका उद्देश्य समुदाय के लोगों को छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देना था। शिविरों में संबंधित अधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में लोगों की समस्याएं सुनी गईं और आवेदन प्राप्त किए गए।
दस्तावेजों की कमी से योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी

शिविरों में दस्तावेज तैयार कराने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामले सामने आए। कई परिवारों के पास समग्र आईडी, आधार कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं होने की जानकारी मिली। इसके चलते पात्र होने के बावजूद कुछ लोग शासन की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं।
अभियान के दौरान मिले आवेदनों के निराकरण के लिए अब अगला चरण शुरू करने की तैयारी है। इसके तहत पात्र हितग्राहियों के दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर एक महीने के भीतर उन्हें जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे संबंधित परिवारों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।
बरकतुल्ला विश्वविद्यालय में हुआ समापन समारोह
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य क्षेत्र मध्य भारत के घुमंतू कार्य प्रमुख श्री गोरेलाल वारचे शामिल हुए। कार्यक्रम में बरकतुल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री दीनदयाल बेदिया, मध्य भारत प्रांत के दस्तावेज कार्य प्रमुख श्री सौरभ द्विवेदी, विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री नायक, घुमंतु विभाग के सहायक संचालक श्री स्वप्निल माहेश्वरी, श्री योगेश राज और समाजसेवी श्री लोकेंद्र मजोका सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगाए गए शिविरों के अनुभव साझा किए गए। साथ ही प्राप्त आवेदनों और समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए किए गए प्रयासों पर चर्चा हुई। अभियान के जरिए विभाग, प्रशासन और संबंधित कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाकर विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु समुदायों की समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशने की पहल की गई।अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिविरों में मिले आवेदनों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और पात्र परिवारों तक तय समय में जरूरी दस्तावेज पहुंच पाते हैं।