हरीश राणा का अंतिम संस्कार

इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार, अंगदान से 6 लोगों को मिला जीवनदान

31 वर्षीय हरीश राणा, जिन्हें हाल ही में इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी, 13 वर्षों तक कोमा में रहने के बाद उनका दिल्ली में अंतिम संस्कार किया गया।

By : सपना तंवर
 इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार, अंगदान से 6 लोगों को मिला जीवनदान

इच्छामृत्यु पाने वाले गाजियाबाद के 31 वर्षीय हरीश राणा का बुधवार सुबह दिल्ली में अंतिम संस्कार कर दिया गया। ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में सुबह करीब 9:40 बजे उनके छोटे भाई आशीष राणा ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार और मौजूद लोग भावुक नजर आए।

कोई भी न रोए

अंतिम संस्कार से पहले हरीश के पिता अशोक राणा ने बेटे को अंतिम प्रणाम किया और हाथ जोड़कर उपस्थित लोगों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि कोई भी न रोए, ताकि उनका बेटा शांति से विदा हो सके। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि अगला जन्म हरीश के लिए सुखद हो।

6 लोगों को दिया जीवनदान

हरीश राणा ने 24 मार्च को दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। वे पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे। डॉक्टरों के अनुसार, परिवार ने उनके फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए हैं, जिससे छह लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।

प्राकृतिक रूप से मृत्यु

हरीश को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) दिया गया था। इसका अर्थ है कि मरीज को जीवित रखने के लिए दिए जा रहे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाकर प्राकृतिक रूप से मृत्यु होने दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इस मामले में इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।

14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद स्थित घर से एम्स लाया गया था, जबकि 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई थी।

13 साल पहले हादसे ने बदल दी जिंदगी
हरीश राणा मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले थे और चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। वर्ष 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिससे उनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया और वे कोमा में चले गए।

डॉक्टरों ने उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित बताया था, जिसमें मरीज पूरी तरह से वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब पर निर्भर रहता है। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनके शरीर पर गहरे घाव भी बन गए थे और उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।

इस स्थिति ने न केवल हरीश के लिए बल्कि उनके परिवार के लिए भी मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद कठिन हालात पैदा कर दिए थे। 13 वर्षों तक इलाज, दवाइयों और देखभाल में परिवार पूरी तरह टूट चुका था।

कोर्ट तक पहुंचा मामला
हरीश के परिवार ने 3 अप्रैल 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें अंततः राहत मिली। हरीश राणा की कहानी ने न केवल इच्छामृत्यु बल्कि अंगदान जैसे संवेदनशील विषयों पर भी देशभर में नई बहस छेड़ दी है।

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