MP Tiger Count May Cross 1000, Habitat Crisis

बाघों की संख्या 1000 पार होने पर रहवास का संकट खड़ा हो सकता है। 

मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 1000 पार होने की संभावना के बीच रहवास संकट गहराने का खतरा बढ़ा है। बांधवगढ़, कान्हा और पेंच में क्षमता से कई गुना अधिक बाघ पाए जा रहे हैं।

By : स्वदेश डेस्क
बाघों की संख्या 1000 पार होने पर रहवास का संकट खड़ा हो सकता है। 

प्रदेश के टाइगर अभयारण्यों में क्षमता से कई गुना अधिक हैं बाध

मध्य प्रदेश में बाघों की हो रही नयी गणना में प्रारंभिक सूचना मिल रही है कि बाघों की संख्या एक हजार पार कर सकती है। इसे कई मायने में सुखद और सकारात्मक खबर मानी जा सकती है, लेकिन जानकारों का कहना है कि उनके प्राकृतिक रहवासों का घटता क्षेत्रफल मुसीबत भी खड़ी कर सकता है। बाघों के घटते रहवासों को कमतर नहीं माना जा सकता है। स्थिति यह है कि बांधवगढ़ अभयारण्य में 30 बांघों की क्षमता है। यहां 104 रहे रहे हैं। इसी तरह कान्हा में 41 की जगह 61 और पेंच में 23 की जगह 61 बाघ विचरण कर रहे हैं। ऐसे में बाघों की संख्या और बढ़ी तो उनके बीच विचरण योग्य जंगल क्षेत्र के लिए संघर्ष खड़ा हो सकता है।

विशेषज्ञ बाघों का आंकलन इसी साल 2026 में पूरा करेंगे। इसके एक साल बाद यानी 2027 में इसका प्रकाशन विश्व बाघ दिवस पर किया जाएगा। काफी अध्ययन व सत्यापन के बाद ही यह अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी। यही रिपोर्ट भी देश में टाइगर स्टेट का दर्जा तय करेगी। बाघों की संख्या के हिसाब से मध्यप्रदेश कई वर्षों से शीर्ष पर कायम है।

साल 2022 की गणना में यहां 785 बाघ मिले

साल 2022 की गणना में यहां 785 बाघ मिले हैं। इसमें 563 बाघ टाइगर रिजर्व में मौजूद हैं और 222 बाघ अभयारण्य एवं टाइगर रिजर्व (संरक्षित क्षेत्र) से बाहर है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक वयस्क बाघ औसतन 50 वर्ग किमी का क्षेत्र टेरटरी के लिये चाहिये। इस हिसाब से बांधवगढ़, कान्हां और पेंच नेशनल पार्क बाघ के घनत्व के मुकाबले छोटे पड़ने लगे है। इसलिए पार्क या दूसरे सुरक्षित क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। बता दें कि प्रदेश में बाघों के विचरण के लिए जरूरी जंगल क्षेत्र लगातार घट रहा है। इसकी वजह से बाघों में आपसी संघर्ष बढ़े हैं इसमें उनकी मौतों की संख्या चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है।

क्षमता से कई गुना अधिक बाघ

राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या उनकी निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक हो चुकी है।

  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जहां लगभग 30 बाघों की क्षमता मानी जाती है, वहां 100 से अधिक बाघ मौजूद हैं।

  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में 41 की क्षमता के मुकाबले करीब 61 बाघ विचरण कर रहे हैं।

  • पेंच टाइगर रिजर्व में 23 की जगह लगभग 61 बाघ पाए जा रहे हैं।

यह आंकड़े बताते हैं कि प्रमुख अभयारण्यों में दबाव लगातार बढ़ रहा है।




 

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