मजदूरी से पुलिस अधिकारी तक

मजदूरी कर बेटियों को बनाया पहलवान, सामाजिक विरोध के आगे नहीं झुके पिता; आज दोनों हैं पुलिस अधिकारी

मुकेश प्रजापति ने आर्थिक तंगी और सामाजिक विरोध के बावजूद अपनी बेटियों को पहलवान बनाया। आज उनकी बेटियां राष्ट्रीय स्तर की पहलवान और पुलिस अधिकारी हैं।

By : नरेंद्र कुमार
मजदूरी कर बेटियों को बनाया पहलवान, सामाजिक विरोध के आगे नहीं झुके पिता; आज दोनों हैं पुलिस अधिकारी

उज्जैन। कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो हालात भी रास्ता बदल देते हैं। उज्जैन के मुकेश प्रजापति और उनकी पत्नी संगीता ने इसी बात को सच कर दिखाया। आर्थिक तंगी, सामाजिक विरोध और परिवार के बहिष्कार जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों के सपनों को टूटने नहीं दिया। आज उनकी दोनों बेटियां राष्ट्रीय स्तर की पहलवान होने के साथ पुलिस अधिकारी भी हैं।हाल ही में छोटी बेटी प्रियांशी प्रजापति ने हिसार में आयोजित अंडर-23 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर परिवार का नाम एक बार फिर रोशन किया है।

बेटियों के लिए छोड़ना पड़ा घर

मुकेश प्रजापति जब पहली बार अपनी बेटियों को कुश्ती के अखाड़े में लेकर गए तो उन्हें परिवार और समाज के विरोध का सामना करना पड़ा। बेटियों के कुश्ती प्रशिक्षण के दौरान शॉर्ट्स पहनने पर विरोध इतना बढ़ा कि उन्हें पत्नी संगीता के साथ अपना घर छोड़ना पड़ा। इसके बाद दोनों ने किराये के एक छोटे से कमरे में रहकर नई शुरुआत की और बेटियों की ट्रेनिंग जारी रखी।

ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर उठाया खर्च

परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। मुकेश ने वर्षों तक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर बेटियों की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाया। वहीं दोनों बेटियां भोपाल स्थित मध्य प्रदेश कुश्ती अकादमी में अभ्यास करती रहीं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी हार नहीं मानी।

राष्ट्रीय चैंपियन बनीं प्रियांशी

मुकेश की छोटी बेटी प्रियांशी प्रजापति, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर हैं, ने हिसार में आयोजित अंडर-23 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। प्रियांशी इससे पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बनाई पहचान

प्रियांशी ने वर्ष 2018 में जापान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और चौथा स्थान हासिल किया था। वह कुश्ती में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली उज्जैन की पहली महिला पहलवान बनी थीं।

दोनों बहनें बनीं पुलिस अधिकारी

प्रियांशी और उनकी बड़ी बहन नुपुर प्रजापति को तीन वर्ष पहले खेल कोटे के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस में नियुक्ति मिली थी। दोनों समान पद पर कार्यरत हैं। खबरों के अनुसार, प्रियांशी को जल्द ही पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर पदोन्नति मिलने की संभावना है।

पिता का एक सपना अभी बाकी

मुकेश प्रजापति चाहते हैं कि उनकी दोनों बेटियों को मध्यप्रदेश पुलिस में भी सेवा का अवसर मिले। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आग्रह किया है कि दोनों खिलाड़ियों को समान पद पर मध्यप्रदेश में नियुक्त किया जाए।

'हर पदक दकियानूसी सोच का जवाब'

संघर्ष के दिनों को याद करते हुए मुकेश कहते हैं कि उन्हें और उनकी पत्नी को ही पता है कि उन्होंने कितना संघर्ष किया है। परिवार का साथ नहीं मिला, समाज ने विरोध किया, लेकिन उन्होंने कभी बेटियों के सपनों से समझौता नहीं किया।उनका मानना है कि उनकी बेटियों का हर पदक उन सामाजिक धारणाओं का जवाब है, जो बेटियों को आगे बढ़ने से रोकती हैं। अब उनके समाज में भी सोच बदल रही है और कई परिवार अपनी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

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