SIR पर सुप्रीम कोर्ट में खुद उतरीं ममता बनर्जी, नाम मिसमैच नोटिस वापस लेने की मांग

SIR पर सुप्रीम कोर्ट में खुद उतरीं ममता बनर्जी, नाम मिसमैच नोटिस वापस लेने की मांग

By : Swadesh Bhopal
SIR पर सुप्रीम कोर्ट में खुद उतरीं ममता बनर्जी, नाम मिसमैच नोटिस वापस लेने की मांग

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) मामले पर सुनवाई की, जहां राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वकीलों के साथ मौजूद रहीं,उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर है। जो काम दो साल में होना था, उसे तीन महीने में कराया जा रहा है। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली लोग चुनावी सूची में बने रहने चाहिए.ममता की याचिका पर बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से जवाब तलब किया है।

चुनाव आयोग ने दिया जवाब

चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य सरकार से बार-बार मांग करने के बावजूद एसआईआर के काम के लिए पर्याप्त ग्रुप-बी अधिकारी नहीं दिए गए। इस कारण माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। आयोग ने कहा कि सभी नोटिस में कारण दर्ज हैं। जिनके नाम हटाए गए, उन्हें अधिकृत एजेंटों को साथ लाने की अनुमति भी दी गई थी।

चुनाव आयोग ने कहा कि जब राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है, तो कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। समय को लेकर कोई समस्या नहीं है।

बेंच ने बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा है। उच्चतम न्यायालय के इतिहास में यह पहला मौका था, जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने स्वयं कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। आमतौर पर ऐसे मामलों में मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही अदालत में पेश होते हैं।

ममता की दर्दभरी दलीलें

ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव से पहले दो महीने में ऐसा कुछ करने की कोशिश की जा रही है, जो दो साल में होना था। उन्होंने दावा किया कि अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। चुनाव आयोग की प्रताड़ना के चलते बीएलओ की जान जा रही है।

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया वोटर्स को शामिल करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें हटाने के लिए की जा रही है। अब तक 58 लाख लोगों के नाम हटाए जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त कराए हैं, जो बीएलओ के अधिकारों को दरकिनार करते हुए नाम हटा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने मांग की कि नाम मिसमैच के आधार पर दिए गए सभी नोटिस वापस लिए जाएं।

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