श्योपुर। मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर चर्चा में है। सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दो मादा चीतों को खुले जंगल में रिलीज किया। दोनों चीते कूनो नदी के किनारे वाले क्षेत्र में छोड़े गए। इन चीतों की पहचान CCV-2 और CCV-3 के रूप में हुई है। इन्हें फरवरी में बोत्सवाना से भारत लाया गया था। क्वारंटीन और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया है।
चीतों के जंगल में उतरते ही ‘प्रोजेक्ट चीता’ को लेकर सरकार ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब मध्य प्रदेश को देशभर में “चीता स्टेट” के रूप में नई पहचान मिल रही है।
‘प्रोजेक्ट चीता’ को क्यों माना जा रहा अहम
भारत में दशकों पहले चीते विलुप्त हो चुके थे। ऐसे में उन्हें फिर से जंगलों में बसाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ शुरू किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2022 में इस अभियान की शुरुआत की थी। सरकार का दावा है कि कूनो में लगातार बढ़ती चीता संख्या इस परियोजना की सफलता का संकेत है।
अधिकारियों के अनुसार, दो और चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से अब इनके प्राकृतिक व्यवहार और शिकार क्षमता पर भी नजर रखी जाएगी। वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी प्रजाति को सिर्फ लाकर छोड़ देना काफी नहीं होता। लंबे समय तक सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त शिकार और जैव विविधता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
देश में अब 57 पहुंची चीतों की संख्या
फरवरी में बोत्सवाना से कुल नौ चीते भारत लाए गए थे, जिनमें छह मादा और तीन नर शामिल थे। इन्हें पहले छोटे बाड़ों में रखा गया, ताकि वे भारतीय मौसम और जंगल के माहौल के अनुसार खुद को ढाल सकें। अधिकारियों के अनुसार, भारत में अब चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है। इसमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बोत्सवाना से आए चीते बेहतर जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं। इससे भविष्य में स्वस्थ और स्थायी चीता आबादी तैयार करने में मदद मिल सकती है।
नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भी आए थे चीते
‘प्रोजेक्ट चीता’ का यह तीसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय चरण माना जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए थे। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे। इन चरणों के जरिए सरकार लगातार चीता पुनर्वास मॉडल को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि परियोजना के दौरान कुछ चीतों की मौत ने सवाल भी खड़े किए थे, जिसके बाद निगरानी और मेडिकल प्रोटोकॉल को और सख्त किया गया। अब सरकार की कोशिश है कि चीतों को धीरे-धीरे पूरी तरह खुले जंगल में स्थापित किया जाए, ताकि वे प्राकृतिक जीवनशैली अपना सकें।
दूसरे अभयारण्यों में भी बढ़ेगी चीता मौजूदगी
वन विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में कुछ चीतों को गांधी सागर और नौरादेही अभयारण्यों में भी शिफ्ट किया जा सकता है। इसका मकसद सिर्फ कूनो तक चीता परियोजना को सीमित रखना नहीं, बल्कि अलग-अलग संरक्षित क्षेत्रों में उनका सुरक्षित विस्तार करना है। इससे एक ही स्थान पर दबाव कम होगा और चीता आबादी को बेहतर स्पेस मिल सकेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चीतों को रिलीज करने के बाद कूनो नेशनल पार्क का दौरा भी किया और परियोजना की प्रगति की जानकारी ली।