भोपाल। लोक निर्माण विभाग ने मध्य प्रदेश की सडक़ों और विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए लोक कल्याण सूचकांक आधारित ऑनलाइन सिस्टम तैयार किया है। इसमें अलग-अलग मानकों के आधार पर हर काम का मूल्यांकन किया जाएगा। इसकी निगरानी राजधानी भोपाल से की जाएगी।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार मप्र ग्रामीण विकास कार्पोरेशन समेत अन्य एजेंसियों की सडक़ें, पुल और पुलिया भी इसके दायरे में आएंगे। इस सिस्टम की खासियत ये है कि निगरानी सिर्फ पीडब्ल्यूडी की सडक़ों तक सीमित नहीं रहेगी। सडक़ ठीक है या खराब, निर्माण समय पर हुआ या नहीं, बजट का कितना उपयोग हुआ और सडक़ बनने के कुछ समय बाद ही गड्ढे पड़ गए या नहीं, अब इन सवालों का जवाब केवल अफसरों की निरीक्षण रिपोर्ट से नहीं मिलेगा। सडक़ की स्थिति का डेटा खुद सामने आएगा। इससे पता चलेग कि सडक़ किस विभाग ने बनाई है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये होगा कि, उसकी वास्तविक स्थिति क्या है? ये भी पता रखा जा सकेगा।
अब छिपा नहीं सकेंगे गड्ढे
मंत्री सिंह के अनुसार अब किसी सडक़ को कागजों में बेहतर बताना आसान नहीं होगा। सिस्टम में सडक़ निर्माण की प्रगति, स्वीकृत बजट, तय समय सीमा, सडक़ की वर्तमान स्थिति, गड्ढे और मेंटेनेंस जैसे बिंदुओं की निगरानी होगी। जनता की शिकायतें कितनी मिली और उनका निर्धारित समय में निराकरण हुआ या नहीं, यह भी रिकॉर्ड में रहेगा।
इनका कहना है..
राजधानी समेत पूरे प्रदेश में सडक़ें बनाने वाली एजेंसियों के लिए नया ऑनलाइन सिस्टम लोक कल्याण सूचंकाक शुरू किया जा रहा है। इसमें सडक़ों के गड्ढे, मेंटनेंस हुआ या कि नहीं आदि समेत जनता की सडक़ों को लेकर की शिकायतों की जानकारी मिल सकेगी।
- राकेश सिंह, लोनिवि मंत्री भोपाल।