प्रमोद दुबे
भोपाल: सात दिवस पूर्व मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट की बैठक के बाद स्थानांतरण पर एक वर्ष पूर्व लगाए गए प्रतिबंध को मई महीने में समाप्त किए जाने एवं 30 मई अथवा उससे अधिक समय तक के लिए स्थानांतरण प्रारंभ होने के संकेत प्राप्त हुए थे। परंतु केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश के अंतर्गत वर्ष 2027 तक जनगणना में लगे हुए कर्मचारियों के स्थानांतरण पर प्रतिबंध संबंधित पत्र जारी होने के बाद लगभग 1 लाख से अधिक कर्मचारी
स्थानांतरण प्रक्रिया से दूर हो जाएंगे।
ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को राहत की तैयारी में सरकार।
अब इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने संबंधित कर्मचारियों को कुछ राहत देने की योजना पर काम करना प्रारंभ किया है। मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के विशेष परिस्थितियों में यह छूट मिल सकती है। तबादलों पर लगी यह रोक मुख्य रूप से उन कर्मचारियों पर लागू होगी जो सीधे जनगणना कार्य से जुड़े हैं। हालांकि प्रशासनिक मजबूरी, गंभीर चिकित्सा कारण या अन्य असाधारण परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से तबादले किए जा सकेंगे। अर्थात जनगणना ड्यूटी में लगे लोगों को स्थानांतरण का लाभ देने के लिए उन्हें मेडिकल अथवा अन्य आधार पर इस प्रक्रिया से लाभ दिया जा सकता है । इस मामले में विस्तृत जानकारी गजट नोटिफिकेशन अथवा कैबिनेट की बैठक में सामने आ सकती है।
प्रदेश में 1.90 लाख कर्मचारी होंगे प्रभावित
मध्यप्रदेश में लगभग 1.90 लाख अधिकारी-कर्मचारी जनगणना ड्यूटी में तैनात किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से शिक्षक, पटवारी, ग्राम सचिव और स्थानीय निकायों के कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी पर तबादला प्रतिबंध लागू रहेगा। जनगणना कार्यक्रम के अनुसार उपरोक्त कर्मचारियों को वर्ष 2027 तक अर्थात जनगणना के द्वितीय चरण तक ड्यूटी में लगा रहना होगा। प्रथम चरण 1 महीने का रहेगा इसके बाद अगर जनगणना ड्यूटी से पृथक रहने से संबंधित आवेदन पर जिलाधिकारी द्वारा विचार किया जाएगा जिसमें ठोस आधार के क्रम में जनगणना से पृथक विभिन्न परिस्थितियों में किया जाएगा इसके संबंध में केंद्रीय एवं राज्य सरकार की सामूहिक गाइडलाइन का पालन करना होगा।