प्रमोद शर्मा, हापुड़: दवा बीमारी से राहत देती है, लेकिन कई बार इसके इस्तेमाल के दौरान होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रिया मरीज के लिए परेशानी का कारण भी बन सकती है। ऐसी स्थिति की समय पर पहचान और सही रिपोर्टिंग मरीज की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। इसी संदेश को लेकर छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के अवसर पर सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जागरूकता एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
संस्थान के फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ और फैकल्टी सदस्यों को प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया (एडीआर) की पहचान, दस्तावेजीकरण, एडीआर फॉर्म भरने और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया समझाई गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम एनसीसी, आईपीसी, गाजियाबाद एवं भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि दवा के इस्तेमाल के बाद सामने आने वाली किसी भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सही जानकारी दर्ज कर उसकी समयबद्ध रिपोर्टिंग करने से दवाओं की सुरक्षा पर नजर रखने और मरीजों को बेहतर एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। प्रतिभागियों को भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) के तहत रिपोर्टिंग की प्रक्रिया भी विस्तार से समझाई गई।
कार्यशाला में केवल किताबी जानकारी तक ही प्रशिक्षण सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रतिभागियों को एडीआर फॉर्म भरने और रिपोर्ट तैयार करने का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि प्रतिकूल प्रतिक्रिया सामने आने पर कौन-कौन सी जानकारियां दर्ज करना आवश्यक है और रिपोर्टिंग में किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रशिक्षण के बाद फार्माकोविजिलेंस एवं एडीआर रिपोर्टिंग विषय पर इंटरैक्टिव क्विज का आयोजन किया गया। इसमें स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ नर्सिंग स्टाफ ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। क्विज के जरिए प्रतिभागियों के ज्ञान को परखने के साथ महत्वपूर्ण बिंदुओं को दोहराया गया।
कार्यक्रम में संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल डॉ. चरनजीत सिंह अहलूवालिया, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. सहगल, जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन और डायरेक्टर रघुवार दत्त सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, विद्यार्थी और नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समन्वय फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. कविता धर बगाती ने टीम के साथ किया। आयोजन में डॉ. शाकिता फातिमा, डॉ. तबिंदा नज़ीर, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. अंकित अग्रवाल, डॉ. सोनाक्षी सिंह, डॉ. तरुण शर्मा, डॉ. श्रेया सक्सेना, डॉ. श्याम सुंदर, डॉ. उत्कर्ष हरि, डॉ. अखिलदास, डॉ. सुरभि एवं डॉ. दीपक ने सक्रिय भूमिका निभाई।
समापन पर आयोजकों ने चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन और वाइस-चेयरपर्सन डॉ. रम्या रामचंद्रेन के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार जताया। कार्यशाला के माध्यम से संस्थान ने सुरक्षित दवा उपयोग, रोगी सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।