महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि की धूम, भांग-चंदन से हुआ बाबा का दिव्य श्रृंगार

महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि की धूम, भांग-चंदन से हुआ बाबा का दिव्य श्रृंगार

कोटेश्वर महादेव का प्रथम पूजन, केसर-चंदन उबटन के साथ विशेष अभिषेक शुरू

By : Swadesh Bhopal
महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि की धूम, भांग-चंदन से हुआ बाबा का दिव्य श्रृंगार

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार से शिवनवरात्रि उत्सव की विधिवत शुरुआत हो गई। तिथि की वृद्धि के कारण इस वर्ष शिवनवरात्रि दस दिवसीय मनाई जा रही है। पहले दिन परंपरा अनुसार भगवान कोटेश्वर महादेव का प्रथम पूजन किया गया, इसके बाद बाबा महाकाल को केसर-चंदन का उबटन लगाकर हल्दी अर्पित की गई।गर्भगृह में शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में 11 ब्राह्मणों की टीम ने बैठकर एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक संपन्न कराया। शाम के समय बाबा महाकाल का भांग और चंदन से विशेष श्रृंगार किया गया, जिससे मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर नजर आया।

दस दिनों तक चलेगा विशेष पूजन-अभिषेक क्रम

शिवनवरात्रि का आरंभ कृष्ण पंचमी से हुआ है। अब अगले दस दिनों तक प्रतिदिन कोटेश्वर महादेव और भगवान महाकालेश्वर का नित्य विशेष पूजन-अभिषेक किया जाएगा। पहले कोटेश्वर महादेव की आरती होगी, उसके बाद गर्भगृह में महाकालेश्वर का पूजन होगा.इसी क्रम में प्रतिदिन 11 ब्राह्मणों द्वारा गर्भगृह में बैठकर एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक किया जाएगा। भोग आरती से पहले बाबा को केसर-चंदन का उबटन लगाया जाएगा, यह क्रम पूरे उत्सवकाल तक चलेगा।पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से भगवान महाकालेश्वर का सांध्य पूजन और श्रृंगार किया जाएगा। यह विशेष क्रम 14 फरवरी तक नित्य रूप से जारी रहेगा।

15 फरवरी को महाशिवरात्रि, 44 घंटे खुले रहेंगे मंदिर के पट

15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान महाकालेश्वर का पूरे दिन सतत जलधारा से अभिषेक होगा। रातभर विशेष महापूजन संपन्न किया जाएगा. इसके अगले दिन 16 फरवरी को प्रातः सप्तधान श्रृंगार और सवामन पुष्प मुकुट के दर्शन होंगे। सेहरा आरती के साथ-साथ वर्ष में एक बार होने वाली दोपहर 12 बजे की भस्म आरती भी इसी दिन होगी.इस दौरान श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर के पट करीब 44 घंटे तक लगातार खुले रहेंगे।

18 फरवरी को होगा शिवनवरात्रि उत्सव का समापन

पं. शर्मा के अनुसार 18 फरवरी को सायंकाल पूजन से शयन आरती तक भगवान महाकालेश्वर के पश्च मुखारविंद के दर्शन होंगे। इसके साथ ही श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव का विधिवत समापन होगा।

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