Mahakal Temple Noon Bhasma Aarti Today on Mahashiv

साल में एक बार दोपहर की भस्मारती : महाकाल मंदिर में चार प्रहर का पूजन, रात 11 बजे बंद होंगे पट

महाशिवरात्रि पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में आज साल में एक बार दोपहर 12 बजे भस्म आरती होगी। चार प्रहर पूजन के बाद सेहरा अर्पित किया जाएगा

By : नरेंद्र कुमार
साल में एक बार दोपहर की भस्मारती : महाकाल मंदिर में चार प्रहर का पूजन, रात 11 बजे बंद होंगे पट

महाशिवरात्रि की रात उज्जैन में आस्था अपने चरम पर दिखी। श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार देर रात तक चार प्रहर का विशेष पूजन-अभिषेक और अनुष्ठान चलता रहा। सोमवार को भगवान महाकाल को सेहरा अर्पित किया जाएगा और इसी के साथ साल में एक बार होने वाली दोपहर की भस्म आरती संपन्न होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

रविवार रात करीब 10.30 बजे मंदिर में चार प्रहर पूजन की शुरुआत हुई। एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ 11 ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का अभिषेक किया। इसके बाद पांच प्रकार के फलों के रस से विशेष अभिषेक किया गया, जिससे पूरा गर्भगृह भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

पंचामृत से अभिषेक, सप्तधान्य अर्पण

चार प्रहर पूजन के दौरान पंचामृत अभिषेक किया गया। इसमें दूध, दही, घी, शहद, खांडसारी शक्कर, गंगाजल, गुलाब जल, भांग और केसर मिश्रित दूध शामिल रहा। अभिषेक के बाद भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए गए और सप्तधान्य का मुखारविंद धारण कराया गया।भगवान श्री महाकालेश्वर को चावल, खड़ा मूंग, तिल, गेहूं, जौ, साल और खड़ा उड़द के रूप में सप्तधान्य अर्पित किए गए। इसके बाद पुष्प मुकुट शृंगार आरती हुई, जिसमें मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।

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3 क्विंटल फूलों से सजा सेहरा

पुजारी आशीष शर्मा ने बताया कि मंदिर के पुजारियों ने भगवान श्री महाकालेश्वर का भव्य शृंगार कर पुष्प मुकुट यानी सेहरा बांधा। करीब तीन क्विंटल फूलों से तैयार इस सेहरे के साथ भगवान को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड और अन्य आभूषणों से सजाया गया। सेहरा आरती के बाद भगवान को मिष्ठान्न, फल और पंचमेवा का भोग अर्पित किया गया।

आज दोपहर 12 बजे होगी विशेष भस्म आरती

सोमवार सुबह सेहरा दर्शन के बाद वर्ष में एक बार होने वाली दोपहर 12 बजे की भस्म आरती होगी। इसके पश्चात भोग आरती संपन्न होगी और शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा। शाम को नियमित पूजन और शयन आरती के बाद रात करीब 11 बजे भगवान श्री महाकालेश्वर के पट मंगल होंगे।

18 फरवरी को पंचमुख दर्शन के साथ समापन

महाशिवरात्रि पर्व का समापन 18 फरवरी, बुधवार को होगा। इस दिन वर्ष में एक बार एक साथ होने वाले पंचमुखारविंद—यानी भगवान महाकाल के पांच स्वरूपों के एक साथ दर्शन—श्रद्धालुओं को प्राप्त होंगे। इसे लेकर उज्जैन में पहले से ही भारी श्रद्धालु भीड़ और उत्साह का माहौल है।

 

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