बदनाम सब्ज़ियों की कहानी

कुछ लोग अच्छे होकर भी बदनाम हो जाते हैं

कुछ सब्ज़ियाँ जैसे टिंडा, लौकी, तोरी, और कद्दू पोषण से भरपूर होते हुए भी बदनाम हैं। डॉक्टरों ने अब इनकी छवि सुधारने का बीड़ा उठाया है।

By : स्वदेश डेस्क
कुछ लोग अच्छे होकर भी बदनाम हो जाते हैं

 सतीश शर्मा

जैसे कुछ लोग अच्छे होकर भी बदनाम हो जाते हैं, वैसे ही कुछ सब्ज़ियाँ अच्छी होकर भी बदनाम हो जाती हैं। टिंडा, लौकी, तोरी और कद्दू ऐसी ही कुछ सब्ज़ियाँ हैं, ये स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती हैं, स्वाद में भी ठीक ही होती हैं, पर न जाने क्यों बदनाम हैं, हो सकता है कि किसी समय लोगों को इन्हें ठीक से पकाना नहीं आता हो। यह भी हो सकता है कि किसी प्रभावशाली आदमी के रसोइए ने इन्हें कभी बुरी तरह पकाया हो और कई प्रभावशाली लोगों ने इसे खा लिया हो, तभी से ये सब्ज़ियाँ बदनाम हो गई हों, अगर ऐसा हुआ है, तो इसमें सब्ज़ियों का क्या दोष? बुरा रसोइया तो अच्छी-से-अच्छी सब्ज़ी का बेड़ा ग़र्क़ कर सकता है। हमेशा किसी के कर्मों की सज़ा किसी और को भुगतनी पड़ती है, यह भी हो सकता है कि इन सब्ज़ियों के नाम ही लोगों को पसंद न हों। दरअसल नाम सुनते ही हम किसी के बारे में एक इमेज बना लेते हैं, जैसे किसी का नाम आशुतोष हो, तो लगता है, कोई पढ़ा-लिखा आधुनिक टाइप का आदमी होगा, पर अगर किसी का नाम ओंकार, महेश, महादेव या शंकर हो, तो लगता है, हमारे जैसा ही कोई होगा, जबकि आशुतोष का अर्थ भी वही है। 

एक तरह से तो अच्छा हुआ कि ये सब्ज़ियाँ बदनाम हो गईं, वरना ग़रीबों के लिए मुश्किल हो जाती, उनको हरी सब्ज़ियाँ मिलती ही नहीं, कभी-कभी किसी की बदनामी से किसी का भला भी हो जाता है। इन दिनों डॉक्टरों ने बीड़ा उठा रखा है कि इन सब्ज़ियों के माथे से बदनामी का दाग़ हटाएँगे। उन्होंने सबको बता दिया है कि इनमें कौन-कौन से विटामिन पाए जाते हैं। डॉक्टरों की बात मानकर लोगों ने टिंडा, लौकी वगैरह का रस पीना और कद्दू के बीज खाना शुरू कर दिया है। 

हमने कभी सोचा नहीं था कि ये दिन भी देखने पड़ेंगे, जिन सब्ज़ियों के नाम से ही हम नाक-भौं सिकोड़ते थे, अब उन्हीं के बीज भी खाने लगे हैं। वह दिन दूर नहीं जब डॉक्टर हमें बताएंगे कि सबसे ज़्यादा पोषक तत्व तो छिलकों में होते हैं, भले हम बाक़ी सब्ज़ी फेंक दें, छिलके ज़रूर खाएं। डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई है, अब बदनाम सब्ज़ियाँ तो ख़ुश हैं, पर ग़रीबों के दिल की धड़कन बढ़ गई है, कहीं ऐसा न हो जाय कि उन्हें आलू-प्याज़ से ही गुज़ारा करना पड़े!! 

 

सतीश शर्मा

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