भारत-ब्रिटेन एफटीए

भारत-ब्रिटेन समझौता: समृद्धि की नई उड़ान

भारत और ब्रिटेन के बीच नए मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जिससे कई उद्योगों को लाभ होगा।

By : स्वदेश डेस्क
भारत-ब्रिटेन समझौता: समृद्धि की नई उड़ान

सरकार ने इस समझौते में भारत के हितों की पूरी रक्षा की है। डेयरी, सरकारी खरीद और कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को समझौते से बाहर रखा गया है। अर्थात उपभोक्ता हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया। यह संतुलित कूटनीति की सफलता है।

भारत-ब्रिटेन के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 21वीं सदी के आर्थिक संबंधों की नई इबारत लिखता है। इस समझौते के तहत अब भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक साख, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और 'विकसित भारत 2047' के संकल्प की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह निर्णय आम नागरिकों, किसानों, उद्योगपतियों और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने वाला है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और ब्रिटेन के व्यापारिक संबंध लगभग 400 वर्ष पुराने हैं। किंतु स्वतंत्रता के बाद पहली बार दोनों देश बराबरी के स्तर पर एक व्यापक और संतुलित समझौते तक पहुंचे हैं।पिछले कई वर्षों से चली आ रही वार्ताओं के बाद यह समझौता साकार हुआ है। इसमें भारत सरकार की दूरदर्शी कूटनीति, वाणिज्य मंत्रालय की सतत मेहनत तथा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक मंच देने की सोच स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया संरक्षणवाद की ओर बढ़ रही है। ऐसे में भारत ने मुक्त, निष्पक्ष और नियम-आधारित व्यापार का मार्ग चुना है।

99 प्रतिशत उत्पादों को शुल्क-मुक्त प्रवेश का अर्थ

इस एफटीए की सबसे बड़ी विशेषता टैरिफ में व्यापक कटौती है। भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलने से अनेक क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।

  • टेक्सटाइल एवं परिधान: भारत के सबसे बड़े रोजगार देने वाले इस क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। ब्रिटेन में भारतीय कपड़ों पर लगने वाला 12 प्रतिशत तक का शुल्क अब शून्य हो जाएगा। इससे तिरुपुर, सूरत और भिवाड़ी के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा।
  • चमड़ा एवं जूता उद्योग: आगरा, कानपुर और चेन्नई के लघु उद्योगों को ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा।
  • समुद्री उत्पाद, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य: झींगा, चाय, मसाले, बासमती चावल तथा अचार जैसे भारतीय उत्पाद अब ब्रिटिश सुपरमार्केट में अधिक सस्ते और सुलभ होंगे।
  • इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स एवं रत्न-आभूषण: इन क्षेत्रों के माध्यम से एमएसएमई को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
  • सेवा क्षेत्र: आईटी, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के नए अवसर खुलेंगे। सरकार के अनुसार, इस समझौते से अगले पाँच वर्षों में भारत का ब्रिटेन को निर्यात लगभग दोगुना हो सकता है।

सरकार की पाँच बड़ी उपलब्धियाँ

यह समझौता भारत सरकार की पाँच महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी रेखांकित करता है।

पहला, आत्मनिर्भर भारत को वैश्विक पहचान: 'आत्मनिर्भर' का अर्थ दीवारें खड़ी करना नहीं है, बल्कि ऐसी गुणवत्ता विकसित करना है कि दुनिया स्वयं भारतीय उत्पाद खरीदने के लिए आगे आए। यह एफटीए उसी सोच का प्रमाण है। सरकार ने घरेलू उद्योग को मजबूत करते हुए उसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया है।

दूसरा, किसानों एवं एमएसएमई का सशक्तिकरण: पहले अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का लाभ मुख्यतः बड़ी कंपनियों तक सीमित रहता था। इस बार सरकार ने विशेष रूप से कृषि उत्पादों, समुद्री उत्पादों तथा श्रम-गहन उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया है। इससे गांव का किसान और छोटे शहर का उद्यमी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ेगा।

तीसरा, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर: जब निर्यात बढ़ेगा, तो उत्पादन बढ़ेगा और उत्पादन बढ़ने से रोजगार भी बढ़ेगा। टेक्सटाइल, चमड़ा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में करोड़ों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में गतिशीलता संबंधी प्रावधान युवाओं के सपनों को नई उड़ान देंगे।

चौथा, संतुलित कूटनीति की सफलता: सरकार ने इस समझौते में भारत के हितों की पूरी रक्षा की है। डेयरी, सरकारी खरीद और कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को समझौते से बाहर रखा गया है। अर्थात उपभोक्ता हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया। यह संतुलित कूटनीति की सफलता है।

पाँचवाँ, ग्लोबल साउथ के नेतृत्व की दिशा में कदम: एक समय था, जब व्यापार के नियम पश्चिमी देश तय करते थे। आज भारत नियम बनाने वालों की मेज पर बैठा है। ब्रिटेन जैसे विकसित देश के साथ समान शर्तों पर समझौता करना भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का प्रतीक है।

आम आदमी पर क्या होगा प्रभाव?

इस समझौते का लाभ केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम नागरिक तक भी पहुंचेगा।

पहला, ब्रिटेन से आयातित मशीनरी, तकनीक और कुछ उत्पाद सस्ते होंगे, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी।

दूसरा, नए बाजार उपलब्ध होने से छोटे शहर का निर्यातक भी अब ब्रिटेन के ऑनलाइन मंचों के माध्यम से अपना उत्पाद लंदन तक बेच सकेगा।

तीसरा, वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग में सुधार होगा, जिसका लाभ घरेलू उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।

चुनौतियाँ और संभावित समाधान

अवसरों के साथ चुनौतियाँ भी आती हैं। भारतीय उद्योगों को गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग तथा समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष ध्यान देना होगा। सरकार को विशेषकर एमएसएमई निर्यातकों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध करानी होगी। बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ तथा तेज बनाना होगा।लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार ने शुरुआत कर दी है। इच्छाशक्ति दिखा दी है। अब गेंद उद्योग और उद्यमियों के पाले में है।

निष्कर्ष: नए भारत का उदय

'भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश' केवल एक समाचार शीर्षक नहीं है। यह 140 करोड़ भारतीयों के परिश्रम का सम्मान है। यह उस नए भारत की घोषणा है, जो दुनिया को केवल कच्चा माल नहीं, बल्कि तैयार उत्पाद, सेवाएं और समाधान देना चाहता है।

भारत सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह व्यापार को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार, विकास और गरिमा के रूप में देखती है।यह समझौता भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। एक ऐसा अध्याय, जहां भारत केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियमों के निर्माण में सहभागी है। आइए, इस अवसर का लाभ उठाकर हम सब मिलकर 'विकसित भारत' के निर्माण में अपना योगदान दें, क्योंकि जब भारत का उत्पाद दुनिया में बिकता है, तब भारत का मान भी बढ़ता है।

प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल

(लेखक कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति हैं।)


 

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