छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की प्रगति

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा : अवसर और चुनौतियाँ

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की गतिशीलता सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करती है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और प्रौद्योगिकी के उपयोग से नए अवसर खुले हैं।

By : स्वदेश डेस्क
छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा : अवसर और चुनौतियाँ

डॉ. एस. के. द्विवेदी

उच्च शिक्षा किसी भी राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार होती है। यह केवल कुशल मानव संसाधन तैयार नहीं करती, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और सुशासन को भी गति प्रदान करती है। वर्ष 2000 में गठन के बाद छत्तीसगढ़ ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। केंद्रीय, राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, तकनीकी एवं व्यावसायिक संस्थानों का विस्तार तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन ने राज्य के लिए नए अवसर खोले हैं। इसके बावजूद गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगारपरक शिक्षा तथा क्षेत्रीय असमानताओं जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2021-22 के अनुसार, छत्तीसगढ़ में केंद्रीय, राज्य, निजी एवं विशिष्ट विश्वविद्यालयों सहित उच्च शिक्षा का एक व्यापक तंत्र विकसित हुआ है। राज्य में कृषि, चिकित्सा, विधि, तकनीकी एवं खुली शिक्षा से जुड़े अनेक संस्थान कार्यरत हैं। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में सुधार हुआ है, किंतु यह राष्ट्रीय औसत से अभी भी कम है। दूसरी ओर, महिला विद्यार्थियों की भागीदारी में निरंतर वृद्धि राज्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

छत्तीसगढ़ के पास युवा आबादी के रूप में एक बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ है। राज्य की बड़ी युवा जनसंख्या उच्च शिक्षा के विस्तार और कुशल कार्यबल निर्माण के लिए अनुकूल आधार प्रदान करती है। पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों, विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता समावेशी विकास की दिशा में सकारात्मक संकेत है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा को बहुविषयक, लचीला, समावेशी और कौशल-आधारित बनाने पर बल देती है। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुसार विषयों का चयन करने तथा रोजगारोन्मुख शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

छत्तीसगढ़ की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत भी उच्च शिक्षा के लिए विशिष्ट अवसर प्रस्तुत करती है। आदिवासी ज्ञान परंपराओं, जैव विविधता, वन-आधारित अर्थव्यवस्था, एथनोमेडिसिन तथा सतत विकास जैसे विषयों पर उत्कृष्ट अनुसंधान की अपार संभावनाएँ हैं। इसी प्रकार खनिज संसाधन, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार राज्य को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर कर सकते हैं।कोविड-19 महामारी के बाद डिजिटल शिक्षा को नई गति मिली है। यदि डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ किया जाए, तो भौगोलिक विषमताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इन उपलब्धियों के बावजूद कई गंभीर चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा तक पहुँच अभी भी सीमित है। आर्थिक कठिनाइयाँ, परिवहन की कमी, सामाजिक परिस्थितियाँ तथा पारिवारिक दायित्व अनेक विद्यार्थियों को माध्यमिक शिक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ने के लिए विवश कर देते हैं।दूसरी प्रमुख चुनौती शिक्षा की गुणवत्ता है। अनेक महाविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाओं, समृद्ध पुस्तकालयों, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुविधाओं तथा उद्योगों से सहयोग का अभाव है। योग्य एवं स्थायी शिक्षकों की कमी भी शिक्षण और अनुसंधान की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में भी राज्य को लंबा सफर तय करना है। राष्ट्रीय स्तर की तुलना में शोध प्रकाशनों, पेटेंट, शोध अनुदानों और उद्योग-समर्थित परियोजनाओं की संख्या सीमित है। साथ ही, उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण इंटर्नशिप, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाते।

निष्कर्षतः, छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा एक महत्वपूर्ण संक्रमण काल से गुजर रही है। पिछले दो दशकों में संस्थागत विस्तार उल्लेखनीय रहा है, परंतु अब प्राथमिकता गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल समावेशन और रोजगारपरक शिक्षा पर होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, पर्याप्त निवेश, सक्षम नेतृत्व तथा उद्योगों के साथ मजबूत सहयोग के माध्यम से छत्तीसगढ़ मध्य भारत का एक प्रमुख ज्ञान एवं नवाचार केंद्र बन सकता है। यही परिवर्तन राज्य के युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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