भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में करीब 500 सहायक प्राध्यापक सालों से प्रमोशन के इंतजार में बैठे हैं। वजह है परिवीक्षा अवधि यानी प्रोबेशन पीरियड की तारीखों में गड़बड़ी। ये सभी 2004 और 2005 में बैकलॉग के तहत भर्ती हुए थे। तारीखें साफ न होने से उनकी सेवा अवधि और वरिष्ठता के आधार पर मिलने वाले फायदे रुके हुए हैं। अब प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ ने उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को पत्र लिखकर मामला जल्द सुलझाने की मांग की है।
संघ ने पत्र में क्या कहा
संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ आनंद शर्मा के मुताबिक परिवीक्षा अवधि की गणना का यह मामला कई साल से पेंडिंग है। सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही। देरी की मार उन शिक्षकों पर पड़ रही है, जो बरसों से कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं।
प्रमोशन की प्रक्रिया में भी आ रही अड़चन
कॉलेजों में अभी सहायक प्राध्यापकों को सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत करने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में परिवीक्षा अवधि की तारीखें तय नहीं होने से इन शिक्षकों के प्रमोशन से वंचित रह जाने का खतरा है।
तीन साल से मंत्रिपरिषद के सामने नहीं पहुंचा मामला
संघ का कहना है कि विभाग पिछले तीन साल से इस मामले को मंत्रिपरिषद के सामने रखने की बात कह रहा है, पर अब तक हल नहीं निकला। इस बीच सामान्य प्रशासन, वित्त और विधि विभाग से बार बार राय लेने का सिलसिला चल रहा है। संघ ने मांग की है कि विभाग अपने स्तर पर जल्द फैसला ले और पात्र सहायक प्राध्यापकों को वरिष्ठता और सेवाकाल के हिसाब से प्रमोशन, करियर एडवांसमेंट समेत सारे लाभ दे।