मिलावट के विरुद्ध कठोर कानून जरूरी

मिलावट के विरुद्ध कानून ही नहीं, प्रभावी अमल भी जरूरी

प्रो. डॉ. राकेश शर्मा के अनुसार, मिलावट के विरुद्ध कठोर कानून के साथ-साथ उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी आवश्यक है ताकि जनस्वास्थ्य की रक्षा हो सके।

By : नरेंद्र कुमार
मिलावट के विरुद्ध कानून ही नहीं, प्रभावी अमल भी जरूरी

खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे जनस्वास्थ्य और मानव जीवन पर हमला है। जिस भोजन को मनुष्य अपने जीवन और स्वास्थ्य का आधार मानकर ग्रहण करता है, उसमें जानबूझकर हानिकारक या घटिया पदार्थ मिलाकर मुनाफा कमाना सामान्य कारोबारी अपराध नहीं माना जा सकता। यह सामाजिक विश्वास के साथ गंभीर आपराधिक विश्वासघात है। इसलिए मिलावटखोरी के विरुद्ध कानून जितना कठोर हो, उसका क्रियान्वयन उससे भी अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध होना चाहिए।

हाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य पदार्थों की शुद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता न करने का स्पष्ट संदेश दिया है। मानव अपशिष्ट, अखाद्य अथवा गंदी वस्तुओं की मिलावट रोकने और दोषियों के विरुद्ध कठोर दंड का प्रस्ताव इसी गंभीरता को दर्शाता है। ऐसे अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाने की पहल महत्वपूर्ण है, लेकिन असली चुनौती यह है कि क्या कानून का भय वास्तव में मिलावटखोरों तक पहुंच रहा है?

आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि मिलावटखोर इतने बेखौफ क्यों हैं। इसका कारण यह है कि उन्हें विश्वास रहता है कि पकड़े जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया वर्षों तक चल सकती है। नमूना जांच, प्रयोगशाला रिपोर्ट, मुकदमा और अदालत की लंबी प्रक्रिया कठोर कानून के निवारक प्रभाव को कमजोर कर देती है। सजा में जितनी देरी होती है, कानून का डर उतना ही कम होता जाता है।

बेंगलुरु जैसे अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले शहर में खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान कई होटल और रेस्तरां में बासी तथा निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री मिलने की घटनाएं बताती हैं कि समस्या केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं है। यदि प्रतिष्ठित संस्थानों में भी उपभोक्ता की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है, तो छोटे होटल, ढाबों और फुटपाथी दुकानों की निगरानी पर गंभीरता से विचार करना होगा।

यह किसी एक शहर की समस्या नहीं है। देशभर में नकली घी, खाद्य तेल, पनीर, खोया, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों की मिलावट के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि मिलावटखोरी अब संगठित कारोबार का रूप ले चुकी है। त्योहारों से पहले छापेमारी और बाद में शिथिलता की परंपरा से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

भारत में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 पहले से लागू है। असुरक्षित खाद्य पदार्थों के मामलों में कठोर दंड और मृत्यु जैसे गंभीर परिणामों पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान भी मौजूद है। फिर भी यदि मिलावटखोरों में कानून का भय नहीं है, तो समस्या कानून की कमी नहीं, बल्कि उसके प्रभावी अमल की है।

गंभीर मिलावट के मामलों के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था और समयबद्ध सुनवाई आवश्यक है। नमूना जांच से लेकर अभियोजन तक प्रत्येक चरण की समयसीमा तय हो। दोष सिद्ध होने पर लाइसेंस रद्द करने, कारोबार बंद कराने और आर्थिक दंड लगाने की कार्रवाई प्रभावी हो। बार-बार अपराध करने वालों के लिए दंड कई गुना कठोर होना चाहिए। यदि मिलावटी खाद्य पदार्थ से किसी व्यक्ति को गंभीर बीमारी, स्थायी क्षति अथवा मृत्यु होती है, तो ऐसे मामलों में कम-से-कम आजीवन कारावास जैसी कठोरतम सजा सुनिश्चित होनी चाहिए।

बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों में केवल कंपनी पर जुर्माना लगाकर जिम्मेदारी समाप्त नहीं होनी चाहिए। जिन निदेशकों, संचालकों अथवा जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी, सहमति या लापरवाही से मिलावटी खाद्य बाजार में पहुंचा, उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही तय हो। अपराध से अर्जित लाभ जब्त करने और पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की व्यवस्था भी आवश्यक है।

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। नमूना कब लिया गया, किस अधिकारी ने लिया, किस प्रयोगशाला में भेजा गया, रिपोर्ट कब आई और उसके बाद क्या कार्रवाई हुई—इन सभी चरणों का डिजिटल रिकॉर्ड सार्वजनिक निगरानी के दायरे में होना चाहिए। अधिकारियों की मिलीभगत या जानबूझकर की गई लापरवाही को भी गंभीर अपराध माना जाए।

अब समय है कि खाद्य सुरक्षा को केवल छापेमारी और त्योहार-विशेष अभियानों तक सीमित न रखा जाए। जोखिम आधारित निरंतर निरीक्षण, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारी और उपभोक्ताओं के लिए सरल शिकायत व्यवस्था अनिवार्य हो। नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने के साथ उसकी जांच की स्थिति जानने का अधिकार भी मिलना चाहिए।

अंततः मिलावटखोरी को सामान्य कारोबारी अनियमितता मानने की मानसिकता बदलनी होगी। भोजन में मिलावट करके मुनाफा कमाना किसी व्यक्ति के जीवन और स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। इसलिए सरकार, प्रशासन, न्यायपालिका, स्थानीय निकाय, खाद्य कारोबारी और उपभोक्ता सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मिलावटखोर को यह विश्वास होना चाहिए कि पकड़े जाने पर बच निकलना आसान नहीं होगा, लाइसेंस और कारोबार खोना पड़ेगा, आर्थिक दंड भुगतना होगा और गंभीर मामलों में शीघ्र कठोर सजा मिलेगी। यही वास्तविक निवारण है।

प्रो. डॉ. राकेश शर्मा

(लेखक स्वदेश के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख हैं।)

संबंधित सामग्री

पीएम मोदी से कल मिलेंगे एशियन पैरा गेम्स के पदक विजेता, भारत ने पहली बार जीते 30 गोल्ड मेडल

पीएम मोदी से कल मिलेंगे एशियन पैरा गेम्स के पदक विजेता, भारत ने पहली बार जीते 30 गोल्ड मेडल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर 2026 को एशियन पैरा गेम्स 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात करेंगे।

Nov 04, 2026
होर्मुज में भारतीय जहाजों को ईरान की विशेष छूट, दवाइयों की जरूरत ने बढ़ाया भारत का सामरिक महत्व

होर्मुज में भारतीय जहाजों को ईरान की विशेष छूट, दवाइयों की जरूरत ने बढ़ाया भारत का सामरिक महत्व

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए भारतीय जहाजों को विशेष छूट दी है। भारत से दवाइयों की जरूरत को इसकी बड़ी वजह बताया गया है। चीन, इराक और कतर को भी राहत मिली है।

Nov 04, 2026
रामायण' का पहला रिव्यू आया सामने, रणबीर कपूर और यश पर भारी पड़ा इस एक्टर का अभिनय; फिल्म में निकली ये कमी

रामायण' का पहला रिव्यू आया सामने, रणबीर कपूर और यश पर भारी पड़ा इस एक्टर का अभिनय; फिल्म में निकली ये कमी

रणबीर कपूर और यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। इसी बीच फिल्म का पहला रिव्यू सामने आने की चर्चा है।

Nov 04, 2026
Train Departure Change: त्योहार से पहले बड़ा बदलाव, रायपुर से बिहार की 3 ट्रेनें अब प्लेटफॉर्म 7 से होगी रवाना

Train Departure Change: त्योहार से पहले बड़ा बदलाव, रायपुर से बिहार की 3 ट्रेनें अब प्लेटफॉर्म 7 से होगी रवाना

दीपावली और छठ की भीड़ को देखते हुए रायपुर रेल मंडल ने बिहार जाने वाली तीन ट्रेनों का प्लेटफॉर्म बदल दिया है।। 4 से 14 नवंबर तक ये गांड़ियाँ प्लेटफॉर्म 7 से रवाना होगी।<br/>

Nov 04, 2026
India vs New Zealand 1st ODI Result: कोहली के अर्धशतक से भारत की धमाकेदार शुरुआत, न्यूजीलैंड 5 विकेट से चित

India vs New Zealand 1st ODI Result: कोहली के अर्धशतक से भारत की धमाकेदार शुरुआत, न्यूजीलैंड 5 विकेट से चित

बारिश से बाधित पहले वनडे में भारत ने न्यूजीलैंड को 5 विकेट से मात दी। डकवर्थ लुईस नियम से 32 ओवर में 143 रन का लक्ष्य मिला, जिसे भारत ने 22.4 ओवर में हासिल कर लिया।

Nov 04, 2026